हॉस्टल से छात्र गायब: क्या Dr. C. V. Raman University में सुरक्षा भगवान भरोसे?

Dr. C. V. Raman University के कुलाधिपति हैं Santosh Choubey

6 दिन से लापता बी-फार्मा छात्र, जर्जर बाउंड्री वॉल, अधूरी सीसीटीवी व्यवस्था — क्या यह विश्वविद्यालय की गंभीर लापरवाही नहीं?

बिलासपुर के कोटा स्थित Dr. C. V. Raman University से बी-फार्मा के छात्र रोहित कुमार का रहस्यमय तरीके से लापता होना केवल एक छात्र की गुमशुदगी का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

छात्रावास जैसे सुरक्षित माने जाने वाले परिसर से अगर कोई छात्र अचानक गायब हो जाए और कई दिनों तक उसका कोई सुराग न मिले, तो यह सामान्य घटना नहीं बल्कि संस्थागत लापरवाही का संकेत माना जाएगा।

बिहार के गया निवासी रोहित कुमार 6 मार्च से लापता हैं। परिवार ने 7 मार्च को थाना कोटा में सूचना दी, लेकिन 12 मार्च तक भी छात्र का कोई पता नहीं चल सका। परिजन जब विश्वविद्यालय पहुंचे तो उन्होंने परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कमजोर पाया। आरोप है कि कई महत्वपूर्ण स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं और विश्वविद्यालय की बाउंड्री वॉल भी जर्जर हालत में है। सवाल यह है कि जब सैकड़ों छात्र छात्रावास में रहते हैं, तब सुरक्षा व्यवस्था इतनी ढीली कैसे हो सकती है?

क्या UGC के नियमों का उल्लंघन?

देश के सभी विश्वविद्यालयों के लिए University Grants Commission (UGC) ने छात्र सुरक्षा को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश तय किए हैं। इन नियमों के अनुसार विश्वविद्यालयों को छात्रावास में 24 घंटे सुरक्षा व्यवस्था, पर्याप्त सीसीटीवी निगरानी, प्रवेश-निकास पर नियंत्रण और छात्र कल्याण से जुड़े तंत्र की व्यवस्था करना अनिवार्य है।

यदि परिसर के कई हिस्सों में सीसीटीवी नहीं हैं और बाउंड्री वॉल जर्जर है, तो यह सीधे-सीधे इन दिशानिर्देशों की अनदेखी मानी जा सकती है। सवाल यह भी है कि क्या विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुरक्षा ऑडिट कराया था? यदि कराया था तो फिर ऐसी स्थिति क्यों बनी हुई है?

छात्र विवाद और संदिग्ध परिस्थितियाँ

परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि रोहित कुमार का कुछ सहपाठियों के साथ विवाद होता था और मारपीट की स्थिति भी बनी थी। यदि ऐसा था, तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से क्यों नहीं लिया? किसी भी हॉस्टल में वार्डन और प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि छात्रों के बीच विवाद को समय रहते सुलझाया जाए।

इस मामले में पुलिस ने एक और पहलू की जांच शुरू की है—ऑनलाइन गेमिंग और करीब 7 लाख रुपये के लेन-देन का एंगल। लेकिन यह जांच का विषय है। इससे विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी कम नहीं हो जाती।

सबसे बड़ा सवाल – जवाबदेही किसकी?

आज देश भर में विश्वविद्यालय अपने इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन जब छात्र की सुरक्षा का सवाल आता है तो अक्सर व्यवस्थाओं की पोल खुल जाती है।

अगर एक छात्र हॉस्टल से गायब हो जाता है और कई दिनों तक किसी को पता नहीं चलता, तो यह केवल एक घटना नहीं बल्कि पूरी निगरानी प्रणाली की विफलता है।

क्या होना चाहिए अब?

– विश्वविद्यालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की स्वतंत्र जांच
– हॉस्टल और कैंपस में पूरी तरह सीसीटीवी निगरानी
-छात्र विवादों की वार्डन और प्रशासन द्वारा नियमित मॉनिटरिंग
-और सबसे महत्वपूर्ण — लापता छात्र की **तत्काल खोज और सच्चाई सामने लाना**

किसी भी विश्वविद्यालय की असली पहचान उसकी इमारतों या विज्ञापनों से नहीं, बल्कि छात्रों की सुरक्षा से होती है। अगर एक छात्र अपने ही हॉस्टल से गायब हो जाए और उसका कोई पता न चले, तो यह पूरे सिस्टम की गंभीर विफलता है।

अब देखना यह है कि क्या इस घटना के बाद केवल औपचारिक जांच होगी, या फिर विश्वविद्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई सख्त और उदाहरणात्मक कार्रवाई भी होगी।

 

  • पंकज खण्डेलवाल

    Pankaj Khandelwal is the Founder & Principal Editor of News Hub Insight (NHI). He is an independent journalist with expertise in governance, education, public policy, civic issues and investigative reporting. His reporting is based on accuracy, public interest and responsible journalism. Every article published under his editorial supervision follows News Hub Insight's Editorial Policy, Fact Check Policy and Correction Policy.

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