बिलासपुर के Narayana e-Techno School के 28 ‘रहस्यमयी छात्रों’ का मामला: NSUI ने शिक्षा विभाग से पूछे तीखे सवाल, जांच का दायरा बढ़ाने की मांग

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DEO कार्यालय का घेराव: 28 छात्रों के रहस्य पर NSUI का उग्र प्रदर्शन, Narayana e-Techno School पर कार्रवाई नहीं हुई तो बड़े आंदोलन की चेतावनी

बिलासपुर। Narayana e-Techno School  से जुड़े कथित 28 रहस्यमयी छात्रों के मामले ने अब राजनीतिक और छात्र आंदोलन का रूप ले लिया है। गुरुवार को NSUI के पदाधिकारियों ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय का घेराव कर जमकर नारेबाजी की और मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

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प्रदर्शन का नेतृत्व NSUI नेता अर्पित केशरवानी, सोहराब खान, गौरव सिंह परिहार, शान सिंह ठाकुर, रिहान रात्रे, देवराज अहिरवार और अमन यादव ने किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करने वाले इस मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि पूरे प्रदेश के छात्र समुदाय को इसकी सच्चाई जानने का अधिकार है।

DEO कार्यालय में प्रदर्शन के बाद NSUI प्रतिनिधिमंडल ने बिल्हा विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) भूपेंद्र कौशिक को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि 28 छात्रों के नामांकन, उपस्थिति, परीक्षा रिकॉर्ड, आधार सत्यापन और विभागीय दस्तावेजों की गहन जांच कर सच्चाई सार्वजनिक की जाए।

छात्र हित में आंदोलन की चेतावनी

NSUI नेता अर्पित केशरवानी ने कहा कि यह मामला केवल एक स्कूल का नहीं बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है।

“यदि Narayana e-Techno Schoo पर जांच के बाद भी कड़ी से कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो NSUI छात्र हित में बड़ा आंदोलन करेगी। जरूरत पड़ी तो जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक संघर्ष किया जाएगा।”

उन्होंने कहा कि यदि छात्र वास्तविक हैं तो उनके रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं और यदि फर्जी नामांकन का मामला है तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

जांच में शामिल होंगे छात्र प्रतिनिधि

ज्ञापन सौंपने के दौरान BEO भूपेंद्र कौशिक ने NSUI प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच प्रक्रिया में छात्र संगठन के प्रतिनिधियों को भी शामिल रखा जाएगा ताकि किसी प्रकार की पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की आशंका न रहे।

इस आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ, लेकिन NSUI ने स्पष्ट कर दिया कि जांच की प्रगति पर उनकी नजर बनी रहेगी।

 छात्र संगठन का आरोप है कि मामला केवल अनुपस्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें फर्जी नामांकन, प्रॉक्सी बोर्डिंग, दस्तावेजी अनियमितता और संभावित वित्तीय गड़बड़ियों जैसे गंभीर पहलू भी हो सकते हैं।

अर्पित से मिली जानकारी के अनुसार, सत्र 2025-26 में कक्षा 5वीं के लिए विभाग को 57 छात्रों की सूची भेजी गई थी। ऐसे में सवाल उठाया गया है कि इन छात्रों के एडमिशन रजिस्टर, उपस्थिति पंजी और मासिक मूल्यांकन रिकॉर्ड कहां हैं। साथ ही यह भी पूछा गया है कि जिन 28 छात्रों के परीक्षा में अनुपस्थित रहने की बात सामने आई, क्या वे पूरे सत्र के दौरान वास्तव में स्कूल में उपस्थित थे या नहीं।

रायपुर के छात्र, परीक्षा केंद्र बिलासपुर!

NSUI ने ज्ञापन में दावा किया है कि संबंधित 28 छात्र रायपुर निवासी बताए जा रहे हैं, जबकि उनका परीक्षा केंद्र बिलासपुर स्थित स्कूल बनाया गया। छात्र संगठन ने पूछा है कि इन छात्रों का प्रवेश किन नियमों के तहत हुआ और क्या उनके आधार व अन्य दस्तावेजों का सत्यापन किया गया था।

‘प्रॉक्सी बोर्डिंग’ और फर्जी नामांकन का संदेह

छात्र नेताओं ने मामले को केवल शैक्षणिक त्रुटि मानने से इनकार करते हुए इसे संभावित ‘प्रॉक्सी एडमिशन’ का मामला बताया है। ज्ञापन में सवाल उठाया गया है कि यदि छात्र पूरे वर्ष स्कूल में दिखाई नहीं दिए, तो विभागीय पोर्टल और U-DISE में उनकी प्रविष्टियां कैसे और किस आधार पर दर्ज की गईं।

RTE और सरकारी योजनाओं पर भी सवाल

ज्ञापन में यह भी पूछा गया है कि कहीं इन नामांकनों का उपयोग RTE प्रतिपूर्ति, छात्रवृत्ति, गणवेश या मध्याह्न भोजन जैसी योजनाओं का लाभ लेने के लिए तो नहीं किया गया। यदि छात्र केवल रिकॉर्ड में मौजूद थे और वास्तविक रूप से अध्ययनरत नहीं थे, तो यह गंभीर प्रशासनिक प्रश्न खड़ा करता है।

FIR की मांग तक पहुंचा मामला

NSUI ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि जांच में छात्र फर्जी या काल्पनिक पाए जाते हैं, तो मामला केवल विभागीय कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए। संगठन ने इसे धोखाधड़ी, कूटरचना (Forgery) और आपराधिक षड्यंत्र की संभावनाओं से जोड़ते हुए दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग उठाई है।

जांच का दायरा बढ़ाने की मांग

छात्र संगठन का कहना है कि मामले की तह तक पहुंचने के लिए जांच केवल स्कूल तक सीमित न रखी जाए, बल्कि रायपुर और बिलासपुर के शिक्षा अधिकारियों, परीक्षा शाखा और संबंधित विभागीय रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जाए।

सवाल अब भी बरकरार

मामले का सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि जिन 28 छात्रों के नाम रिकॉर्ड में दर्ज बताए जा रहे हैं, वे पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान कहां थे? यदि वे स्कूल में अध्ययनरत थे तो उनकी उपस्थिति, मूल्यांकन और अन्य दस्तावेज क्या कहते हैं, और यदि नहीं थे तो उनके नाम शैक्षणिक रिकॉर्ड तक कैसे पहुंचे?

शिक्षा विभाग की जांच अब केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की जवाबदेही की परीक्षा बन चुकी है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और विभागीय कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

  • पंकज खण्डेलवाल

    Pankaj Khandelwal is the Founder & Principal Editor of News Hub Insight (NHI). He is an independent journalist with expertise in governance, education, public policy, civic issues and investigative reporting. His reporting is based on accuracy, public interest and responsible journalism. Every article published under his editorial supervision follows News Hub Insight's Editorial Policy, Fact Check Policy and Correction Policy.

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