अंतरात्मा की आवाज — जब इंसानियत भीड़ पर भारी पड़ती है
डॉ. शगुफ्ता परवीन की कलम से (अंतर्राष्ट्रीय अंतरात्मा दिवस विशेष) आज के दौर में, जब समाज अक्सर संवेदनहीनता और स्वार्थ के आरोपों से घिरा नजर आता है, ऐसे समय में कुछ घटनाएं उम्मीद की लौ जला जाती हैं। 18–19 फरवरी की एक घटना, जिसमें एक मासूम बच्ची भीड़ के बीच बिछड़ गई और एक अनजान युवती ने उसे सुरक्षित उसके परिजनों तक पहुंचाया—सिर्फ एक सामान्य घटना नहीं, बल्कि समाज के लिए एक गहरा संदेश है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि इंसानियत अभी भी…

















