रायगढ़: 11 साल की मिष्ठी ने मचाया धमाल — पहले ही प्रयास में भारत सरकार की राष्ट्रीय छात्रवृत्ति फतह!

रायगढ़ घराने की चौथी पीढ़ी की चमक, 9 साल तक मिलेगी खास कथक तालीम

रायगढ़ | कहते हैं हुनर उम्र का मोहताज नहीं होता… और इस कहावत को सच कर दिखाया है 11 साल की नन्ही कथक नृत्यांगना मिष्ठी वैष्णव ने। बेहद कठिन चयन प्रक्रिया को पहले ही प्रयास में पार करते हुए मिष्ठी ने भारत सरकार की राष्ट्रीय छात्रवृत्ति हासिल कर ली है — और वो भी ऐसी छात्रवृत्ति, जो देश के चुनिंदा प्रतिभाओं को ही नसीब होती है।

यह चयन संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के अधीन सीसीआरटी (Cultural Resources and Training Centre) द्वारा आयोजित परीक्षा के माध्यम से हुआ, जिसमें 10 से 14 वर्ष के टॉप टैलेंटेड बच्चों को चुना जाता है।

 9 साल की सुनहरी तालीम, गुरु का सानिध्य

अब मिष्ठी को अगले 9 वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथक गुरु शरद वैष्णव के मार्गदर्शन में रायगढ़ घराने की बारीकियों—बोल, बंदिश और परंपराओं की गहन ट्रेनिंग मिलेगी।
यानी 20 साल की उम्र तक मिष्ठी एक पूर्ण प्रशिक्षित कथक कलाकार के रूप में तैयार होंगी।

 विरासत में मिला कथक, खून में बसा हुनर

मिष्ठी कोई साधारण प्रतिभा नहीं… वो रायगढ़ कथक घराने के स्तंभ स्वर्गीय पं. फिरतु महाराज की चौथी पीढ़ी हैं।
दादा स्व. पं. राममूर्ति वैष्णव और बड़े पिता गुरु शरद वैष्णव जैसे दिग्गजों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मिष्ठी आज खुद इतिहास रच रही हैं।

परिवार में पं. सुनील वैष्णव और वासंती वैष्णव जैसे नाम भी लगातार उनका मार्गदर्शन करते रहे हैं।

 देशभर में जलवा, गोल्ड मेडल की झड़ी

मिष्ठी पहले ही कई बड़े मंचों पर अपनी कला का लोहा मनवा चुकी हैं।
 बिलासपुर, रायपुर, भिलाई, पुरी, भोपाल, जबलपुर से लेकर दार्जिलिंग तक — हर जगह उन्होंने शानदार प्रस्तुति देकर राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीते हैं।

 मिष्ठी बोलीं — “गुरु का साथ ही मेरी सबसे बड़ी ताकत”

मिष्ठी कहती हैं कि
“मेरे गुरु द्वारा सही मार्गदर्शन और आशीर्वाद ही मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है। मैंने सोचा भी नहीं था कि पहले प्रयास में यह मुकाम मिल जाएगा।”

 सरकार से बड़ी मांग

इतनी बड़ी उपलब्धि के बाद भी मिष्ठी ने एक अहम मुद्दा उठाया है—
-छत्तीसगढ़ के लिए सीटों की संख्या बढ़ाई जाए
ताकि और भी प्रतिभाशाली बच्चों को यह अवसर मिल सके।

 रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड

गौर करने वाली बात ये है कि पिछले 10 वर्षों में श्री वैष्णव संगीत महाविद्यालय से 8 छात्र इस राष्ट्रीय छात्रवृत्ति के लिए चयनित हो चुके हैं — जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है और रायगढ़ को राष्ट्रीय नक्शे पर लगातार चमका रहा है।

रायगढ़ की ये नन्ही सितारा अब सिर्फ शहर नहीं, बल्कि पूरे देश में अपनी चमक बिखेरने को तैयार है।

मिष्ठी वैष्णव ने साबित कर दिया — अगर जुनून और सही गुरु मिल जाए, तो उम्र सिर्फ एक नंबर रह जाती है! 

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