बुद्ध पूर्णिमा : प्राचीन प्रकाश, आधुनिक आवश्यकता और मनुष्य होने की शाश्वत चेतना
✍ डॉ. भूपेन्द्र धर दीवान, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ ( त्वचाविज्ञान आधारित बहु-बुद्धिमत्ता परीक्षण विशेषज्ञ एवं मानसिकमाप परामर्शदाता ) प्रस्तावना : एक तिथि, अनेक आलोक वैशाख मास की पूर्णिमा भारतीय सभ्यता में केवल खगोलीय पूर्णता का क्षण नहीं, बल्कि चेतना की पराकाष्ठा का प्रतीक है। परंपरागत दृष्टि के अनुसार इसी दिन गौतम बुद्ध का जन्म, बोधि-प्राप्ति और महापरिनिर्वाण-तीनों घटनाएँ एक ही आध्यात्मिक धारा में समाहित हो जाती हैं, जो मानव इतिहास को एक अद्वितीय दार्शनिक गहराई प्रदान करती हैं। ऋग्वेद की सार्वभौमिक दृष्टि उद्घोष करती है- “एकं सद्विप्रा…
















