भाजपा राज में अफसरशाही पर सवाल: सीपत तहसीलदार गरिमा ठाकुर न फोन उठातीं, न मैसेज का जवाब; पारदर्शिता कटघरे में
बिलासपुर | शिक्षा विभाग के सख्त आदेशों के बावजूद बिलासपुर में नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है। लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ ने साफ निर्देश दिए थे कि गैर-शैक्षणिक कार्यों में संलग्न कर्मचारी तत्काल अपनी मूल पदस्थापना पर लौटें, लेकिन इसके बावजूद पीयूष मिश्रा (सहायक ग्रेड-3 / बाबू) अब भी अटैचमेंट पर जमे हुए हैं।
क्या है मामला?
– विभागीय आदेश में स्पष्ट कहा गया:
- अटैचमेंट खत्म कर कर्मचारियों को मूल संस्था में भेजा जाए
- गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगे स्टाफ को तुरंत हटाया जाए
लेकिन पीयूष मिश्रा अभी भी तहसील कार्यालय सीपत में कार्यरत बताए जा रहे हैं, जबकि उनकी पदस्थापना स्कूल में है।
पालकों में नाराजगी
स्थानीय पालकों और जनप्रतिनिधियों ने शिकायत में कहा:
– स्कूल में स्टाफ की कमी है
– कामकाज प्रभावित हो रहा है
– जरूरी प्रशासनिक व शैक्षणिक कार्य अटक रहे हैं
– उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि पियूष मिश्रा को तुरंत स्कूल में वापस भेजा जाए।
सबसे बड़ा सवाल
– जब स्पष्ट आदेश जारी हो चुका है, तो
– आखिर किसके संरक्षण में बाबू का अटैचमेंट जारी है?
– क्या विभागीय स्तर पर आदेशों की अनदेखी हो रही है?
– या फिर सिस्टम में कोई अंदरूनी सेटिंग चल रही है?
प्रशासन पर उठे सवाल
- आदेश जारी, लेकिन पालन नहीं
- स्कूल में जरूरत, बाबू बाहर तैनात
– यह सीधे तौर पर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है।
यह मामला सिर्फ एक बाबू का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और जिम्मेदारी का है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर कार्रवाई करता है या फिर आदेश सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाते हैं।
सीधा सवाल:
जब आदेश का पालन ही नहीं होगा, तो व्यवस्था कैसे सुधरेगी?















