बिलासपुर जनदर्शन में फूटा दर्द — एक फरियाद ने हिला दी पूरी व्यवस्था!

“पहली मजदूरी… और जिंदगी भर का अंधेरा” — महावीर की चीख ने सिस्टम को आईना दिखा दिया

बिलासपुर: जनदर्शन का मंच… भीड़ वही, समस्याएं वही… लेकिन इस बार एक फरियाद ऐसी उठी जिसने माहौल बदल दिया। केंद्रीय मंत्री तोखन साहू के सामने जैसे ही एक मां अपने बेटे की टूटी जिंदगी लेकर पहुंची, वहां मौजूद हर शख्स सन्न रह गया।

 “हाईटेंशन लाइन ने छीन लिए दोनों हाथ… अब पैर भी खतरे में”

भरारी थाना कोटा क्षेत्र का 23 वर्षीय महावीर उजागर—जो 29 मार्च को पहली बार मजदूरी के लिए घर से निकला था—33 केवी हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गया।
नतीजा ऐसा कि सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाएं—

  • दोनों हाथ काटने पड़े
  • अब एक पैर भी काटने की नौबत
  • जिंदगी और मौत के बीच जंग जारी

उसे बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया, जहां हर सांस संघर्ष बन चुकी है।

 जनदर्शन में गूंजा गुस्सा — “अभी जवाब दो!”

मामला सामने आते ही मंत्री तोखन साहू का रुख बदला—
यह सिर्फ एक शिकायत नहीं रही, बल्कि तुरंत कार्रवाई का केस बन गया।

– मौके पर ही बिजली विभाग के अफसर तलब
– लापरवाही पर कड़ी फटकार
-स्वास्थ्य विभाग को तुरंत रेफर के निर्देश
– इलाज और आर्थिक मदद का खुला ऐलान

जनदर्शन में ही फैसला — “इलाज में कोई कमी नहीं रहेगी”

 “गांव से सिस्टम तक लड़ाई” — भारती माली बनीं सहारा

जिला पंचायत सदस्य भारती माली ने इस मामले को सिर्फ उठाया नहीं, बल्कि मजबूती से लड़ाई का रूप दिया।

  • कलेक्टर–कमिश्नर तक गुहार पहले ही लग चुकी थी
  • लेकिन कहीं से ठोस मदद नहीं
  • तब खुद परिवार को लेकर पहुंचीं जनदर्शन

उनका साफ कहना—
“ये हादसा नहीं, लापरवाही है… और जवाबदेही तय होगी”

 इलाज में बिक गई जमीन — फिर भी मदद नदारद

महावीर के इलाज में अब तक:

  • ₹8–10 लाख खर्च
  • परिवार ने जमीन तक बेच दी
  • फिर भी आयुष्मान योजना का लाभ नहीं

सबसे बड़ा सवाल—
– इतनी बड़ी घटना के बाद भी
-न सरकार से राहत, न जनप्रतिनिधियों से मदद

“पहले सर्टिफिकेट लाओ…” — बिजली विभाग पर संवेदनहीनता का आरोप

जब परिवार मदद मांगने गया तो जवाब मिला—

-“पहले विकलांगता प्रमाण पत्र लाओ”

यह वही पल था जब सिस्टम की संवेदनशीलता पूरी तरह बेनकाब हो गई।

 फार्म हाउस संचालक का बयान — और भड़का आक्रोश

फार्म हाउस संचालक सौमित्र दीवान का तर्क—

“परिवार ने मदद नहीं मांगी, इसलिए सहयोग नहीं किया”

इस बयान ने मामले को और गर्मा दिया।
भारती माली का पलटवार—

 “मदद पूछकर नहीं, समझकर की जाती है”

 FIR के बाद भी सन्नाटा — कार्रवाई कब?

  • 2 अप्रैल को FIR दर्ज
  • ठेकेदार और संचालक नामजद
  • लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं

 सवाल वही—
जिम्मेदारी तय कब होगी?

 जनदर्शन से उम्मीद… लेकिन सिस्टम की असली परीक्षा बाकी

मंत्री के हस्तक्षेप से इलाज की दिशा जरूर बदली,
लेकिन बड़ा सच यह भी है—

– अगर यह मामला जनदर्शन तक नहीं पहुंचता
– तो शायद आवाज दब जाती

ऊपर तेज कार्रवाई… नीचे खामोशी — यही सिस्टम का सच?

 “मां की आंखों में सिर्फ एक सवाल…”

पिता पहले ही गुजर चुके हैं
घर में सिर्फ बुजुर्ग मां…
और वही बेटा अब जिंदगी से जूझ रहा है

– सवाल सिर्फ एक—
“क्या मेरा बेटा बच पाएगा?”

एक मजदूर की टूटी जिंदगी ने सिस्टम की परतें खोल दीं—
अब देखना ये है कि ये मामला भी खबर बनकर रह जाएगा…
या सच में किसी की जिम्मेदारी तय होगी।

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