बिलासपुर: ईमानदार, निर्भीक और जनसरोकार से जुड़े अधिवक्ता प्रकाश सिंह की मेहनत से उजागर हुई छत्तीसगढ़ शासन को चूना लगाने वाले राजस्व अधिकारी शेष नारायण जायसवाल और शशि भूषण सोनी की काली करतूतें

शासन से मोटा वेतन लेकर बिल्डरों को नियम विरुद्ध शासकीय ज़मीन से रास्ता देने वाले राजस्व अधिकारियों (शेष नारायण जायसवाल, शशि भूषण सोनी) की दबाई गई फाइल खोलने कलेक्टर संजय अग्रवाल ने ADM कुरुवंशी को सौंपी जिम्मेदारी

सरकारी ज़मीन लूट की दबी फाइल खुलेगी: कलेक्टर ने ADM कुरुवंशी को सौंपी जिम्मेदारी, कमिश्नर-कलेक्टर एक्शन मोड में

बिलासपुर। बिलासपुर जिले में शासकीय भूमि और तालाबों पर अवैध कब्जा, फर्जी आदेशों से रास्ता देने और कॉलोनियों के निर्माण जैसे गंभीर मामलों में वर्षों से बेखौफ होकर चल रही गड़बड़ियों पर अब कानून की गाज गिरने लगी है — और इसका बड़ा श्रेय जाता है अधिवक्ता प्रकाश सिंह को, जो लगातार जनहित में ऐसे मामलों को उजागर कर शासन-प्रशासन को चेताते आ रहे हैं।

प्रकाश सिंह की कानूनी सक्रियता और संघर्ष के चलते कई मामलों में भ्रष्टाचार में लिप्त राजस्व अधिकारियों की करतूतें सामने आई हैं, जिससे शासन को लाखों रुपये की क्षति हुई है। इन अधिकारियों में पूर्व अतिरिक्त तहसीलदार शेष नारायण जायसवाल और वर्तमान अतिरिक्त तहसीलदार शशि भूषण सोनी के नाम प्रमुख रूप से शामिल हैं, जिन पर शासकीय भूमि से बिल्डरों को अवैध तरीके से रास्ता देने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।

तालाब, सरकारी ज़मीन और बिल्डर गठजोड़ की परतें खुलीं

प्रकाश सिंह ने जिन मामलों को उजागर किया, उनमें पहला बड़ा मामला है ग्राम बिजौर स्थित शासकीय भूमि का, जहाँ तत्कालीन तहसीलदार शेष नारायण जायसवाल ने गायत्री कंस्ट्रक्शन को नियमविरुद्ध 5120 वर्गफीट शासकीय भूमि से कॉलोनी के लिए रास्ता उपलब्ध कराया, जिस पर कॉलोनी का मुख्य गेट भी बना दिया गया। यह आदेश न केवल अधिकार क्षेत्र से बाहर था, बल्कि शासन को राजस्व नुकसान भी पहुंचाया।

दूसरा मामला वर्तमान अतिरिक्त तहसीलदार शशि भूषण सोनी से जुड़ा है, जिन्होंने ग्राम बहतराई और बिरकोना में बिल्डरों को शासकीय भूमि से रास्ता देने संबंधी आदेश बिना आपत्ति के पारित किए। इन आदेशों के आधार पर बिल्डरों को कॉलोनी निर्माण की अनुमति मिल गई, जिससे करोड़ों की शासकीय भूमि का अतिक्रमण हुआ।

क्या कहते हैं नियम?

छत्तीसगढ़ शासन की अधिसूचना दिनांक 17.12.2011 के अनुसार, शासकीय भूमि से पहुँच मार्ग तभी दिया जा सकता है जब वह अंतर्विभागीय समिति की अनुशंसा और गाइडलाइन के अनुसार आवंटित की जाए। परंतु इन मामलों में आदेश न तो वैधानिक प्रक्रिया से हुए, न ही किसी मूल्य निर्धारण या आवंटन की प्रक्रिया का पालन किया गया।

प्रकाश सिंह – जनहित में समर्पित अधिवक्ता

प्रकाश सिंह को बिलासपुर क्षेत्र में एक ईमानदार, निर्भीक और जनसरोकार से जुड़े अधिवक्ता के रूप में जाना जाता है। तालाबों की भूमि हो या नजूल संपत्तियाँ — उन्होंने हमेशा पारदर्शिता और कानून के दायरे में कार्य करने की पैरवी की है। उनकी पहल पर अब इन मामलों की जाँच तेज हो चुकी है और जिले के नए कलेक्टर एवं कमिश्नर जल्द ही जिम्मेदार अधिकारियों पर निलंबन सहित अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकते हैं।

जनता की मांग: भ्रष्ट अफसरों पर हो कड़ी कार्रवाई

अब जब इन मामलों में ठोस दस्तावेज और प्रमाण सामने आ चुके हैं, तो जनता मांग कर रही है कि शासन भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारियों को सिर्फ निलंबित ही नहीं करे, बल्कि एफआईआर दर्ज कर जेल भेजे। अधिवक्ता प्रकाश सिंह का कहना है, “सरकारी संपत्ति जनता की है, उसे लूटने वालों को कानून के दायरे में लाना हमारी संवैधानिक जिम्मेदारी है।”

शासकीय भूमि, जो जनता की धरोहर है, को बचाने की इस मुहिम में प्रकाश सिंह जैसे अधिवक्ताओं की भूमिका एक मिसाल है। यदि शासन ने इस दिशा में सख्ती बरती, तो यह कार्यवाही प्रदेशभर के लिए एक आदर्श बन सकती है।

  • पंकज खण्डेलवाल

    Pankaj Khandelwal is the Founder & Principal Editor of News Hub Insight (NHI). He is an independent journalist with expertise in governance, education, public policy, civic issues and investigative reporting. His reporting is based on accuracy, public interest and responsible journalism. Every article published under his editorial supervision follows News Hub Insight's Editorial Policy, Fact Check Policy and Correction Policy.

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