बिलासपुर: जब शिक्षक ही बन जाए अपराधी, तो समाज कैसे बचेगा?

मुख्यमंत्री जी! वहशी मानसिकता वाले शिक्षकों को मिले आजीवन कारावास

यदि हम बच्चों को सुरक्षित नहीं रख सकते, तो कोई भी प्रगति, कोई भी विकास, कोई भी शिक्षा — अर्थहीन है- NHI

नाबालिग पीड़िता को न्याय से पहले आरोपी को मिली नौकरी — प्रशासन की संवेदनहीनता उजागर
 

बच्ची के दर्द से ज्यादा चिंता आरोपी की नौकरी की? प्रशासन पर उठे तीखे सवाल  
 

प्राचार्य व प्रभारी DEO डॉ. अनिल तिवारी ने ‘बेड टच’ आरोपी शिक्षक को बहाल कर किया विवाद खड़ा  
 

गंभीर यौन आरोपों के बावजूद आरोपी शिक्षक की बहाली: प्राचार्य एवं प्रभारी DEO डॉ. अनिल तिवारी सवालों के घेरे में  
 

क्या शिक्षा विभाग संवेदनहीन हो गया है? डॉ. अनिल तिवारी के आदेश पर मचा बवाल  

बिलासपुर: तखतपुर में एक शिक्षक द्वारा नाबालिग छात्रा के साथ कथित छेड़छाड़ और इसके बाद आरोपी के फरार होने का मामला न सिर्फ आपराधिक दृष्टि से चिंताजनक है, बल्कि सामाजिक-नैतिक दृष्टि से भी गहरा आघात पहुँचाने वाला है। शिक्षक, जिसे समाज में “गुरु” का स्थान प्राप्त है, जब उसी पर यौन शोषण जैसा संगीन आरोप लगे तो यह घटना केवल एक अपराध नहीं रहती — यह विश्वास की हत्या बन जाती है।

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कठोर कानून, लेकिन क्या व्यवस्था उतनी कठोर है?

भारत में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के लिए POCSO एक्ट, 2012 जैसे सख्त कानून मौजूद हैं। लेकिन कई बार इन मामलों में पीड़ित पक्ष को सामाजिक शर्मिंदगी, लंबी न्यायिक प्रक्रिया और पुलिसिया ढिलाई का सामना करना पड़ता है। इस केस में, हालांकि तखतपुर पुलिस ने तत्परता दिखाई और फरार आरोपी को बिलासपुर से गिरफ्तार किया, लेकिन सवाल उठता है — आख़िर वह इतने दिन तक फरार कैसे रहा?

यदि यह शिक्षक पुलिस की पकड़ से दूर रह सकता है, तो आम अपराधियों के हौसले कितने बुलंद होंगे, इसका अनुमान सहज लगाया जा सकता है।

शिक्षा संस्थानों में सुरक्षा और नैतिक प्रशिक्षण की दरकार

इस घटना ने यह साबित कर दिया कि स्कूल और शिक्षण संस्थान केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा के लिए संवेदनशील क्षेत्र हैं। ज़रूरत है कि:

  • हर स्कूल में चाइल्ड प्रोटेक्शन पॉलिसी सख्ती से लागू की जाए।
  • बैकग्राउंड वेरिफिकेशन और नैतिक प्रशिक्षण शिक्षकों की अनिवार्य प्रक्रिया बने।
  • बच्चों को यौन शिक्षा और शिकायत दर्ज कराने के अधिकारों के बारे में प्रशिक्षित किया जाए।

सामाजिक चुप्पी नहीं, मुखर प्रतिरोध हो

दुर्भाग्यवश, ऐसे मामलों में कई बार समाज या विद्यालय प्रशासन “इज्ज़त बचाने” या “बात दबाने” का प्रयास करता है। यह मानसिकता ही अपराधियों को बढ़ावा देती है। ज़रूरत है कि हर नागरिक, हर माता-पिता, हर शिक्षक इस तरह के अपराध के विरुद्ध स्पष्ट और सार्वजनिक स्वर में खड़े हों।

यदि हम बच्चों को सुरक्षित नहीं रख सकते, तो कोई भी प्रगति, कोई भी विकास, कोई भी शिक्षा — अर्थहीन है।

तखतपुर पुलिस की तत्परता प्रशंसनीय है, लेकिन यह एक सिस्टम की स्थायी सजगता में बदले — यही अपेक्षा है। शिक्षक यदि शोषक बन जाए तो उसका अपराध सामान्य अपराधियों से कहीं अधिक भयावह है। ऐसे में कानून को न केवल तेज़, बल्कि उदाहरण स्थापित करने वाला बनना होगा।

बच्चों की सुरक्षा कोई विकल्प नहीं, समाज की प्राथमिकता होनी चाहिए।

काफी प्रयास करने के बाद पुलिस ने की FIR- अनिल तिवारी 

शिक्षा विभाग ने देरी से लिखवाई FIR- पुलिस 

  • पंकज खण्डेलवाल

    Pankaj Khandelwal is the Founder & Principal Editor of News Hub Insight (NHI). He is an independent journalist with expertise in governance, education, public policy, civic issues and investigative reporting. His reporting is based on accuracy, public interest and responsible journalism. Every article published under his editorial supervision follows News Hub Insight's Editorial Policy, Fact Check Policy and Correction Policy.

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