शांति नगर में नाली निर्माण या लापरवाही का खुला खेल? दो दिन से खुला गड्ढा, सड़क पर मिट्टी का अतिक्रमण और जिम्मेदार मौन!
मेसर्स MT कंस्ट्रक्शन की लापरवाही से बिजली के खंभे पर मंडरा रहा खतरा, कभी भी हो सकता है हादसा! देखिए तस्वीरें
बिलासपुर। शहर के शांति नगर में MT कंस्ट्रक्शन द्वारा कराए जा रहे नाली निर्माण कार्य ने निर्माण व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मौके की स्थिति देखकर सवाल उठता है कि आखिर जनता की सुविधा के लिए बन रही नाली, जनता के लिए ही मुसीबत क्यों बनती जा रही है?
बताया जा रहा है कि ठेकेदार द्वारा नाली निर्माण के लिए सड़क किनारे खुदाई करने के बाद निकलने वाली मिट्टी को व्यवस्थित तरीके से हटाने के बजाय सड़क पर ही डाल दिया जाता है। पहले से संकरी सड़क पर मिट्टी और निर्माण सामग्री जमा होने से सड़क और संकरी हो जाती है, जिसके कारण राहगीरों और वाहन चालकों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सवाल यह है कि निर्माण स्थल से निकली मिट्टी के निपटारे और यातायात व्यवस्था के लिए ठेकेदार को क्या निर्देश दिए गए हैं और उनका पालन कौन सुनिश्चित कर रहा है?
दो दिन से खुला गड्ढा, काम बंद—जिम्मेदारी किसकी?
सबसे गंभीर स्थिति यह है कि स्थानीय जानकारी के अनुसार नाली की खुदाई के बाद बना गड्ढा पिछले दो दिनों से खुला पड़ा है और इन दो दिनों से मौके पर निर्माण कार्य भी आगे नहीं बढ़ा है। खुले गड्ढे के आसपास पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने की स्थिति में कोई जानवर उसमें गिर सकता है। रात के समय अंधेरे में कोई दोपहिया या अन्य वाहन भी गड्ढे में घुस जाए तो गंभीर दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
ऐसे में सवाल केवल नाली निर्माण की गुणवत्ता का नहीं, बल्कि निर्माण स्थल की सुरक्षा और जनता की जान-माल की जिम्मेदारी का भी है।
मिट्टी सड़क पर, गड्ढा खुला और काम ठप—फिर निगरानी किस बात की?
निर्माण कार्यों में ठेकेदार की जिम्मेदारी के साथ-साथ संबंधित तकनीकी अधिकारियों की निगरानी भी अहम होती है। यदि सड़क पर मिट्टी डालने, खुदाई के बाद सुरक्षा इंतजाम करने और निर्माण कार्य को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए नियम हैं, तो उनका पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या मौके पर नियमित तकनीकी निरीक्षण हो रहा है? क्या माप-पुस्तिका (MB) में काम की वास्तविक स्थिति दर्ज हो रही है? क्या गुणवत्ता की जांच की जा रही है? और क्या ठेकेदार को भुगतान से पहले मौके की वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया जाएगा?
‘कमीशन के खेल’ की चर्चा, जांच से ही साफ होगी तस्वीर
निर्माण कार्य को लेकर यदि स्थानीय स्तर पर कमीशनखोरी या मिलीभगत की चर्चा उठ रही है, तो इसे महज चर्चा कहकर खारिज करने के बजाय संबंधित एजेंसी को निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। आखिर जनता के पैसे से होने वाले निर्माण में काम की गुणवत्ता, मात्रा, भुगतान और निगरानी—चारों का हिसाब सार्वजनिक और पारदर्शी क्यों नहीं होना चाहिए?
यदि काम नियमों के मुताबिक है तो जांच में सब साफ हो जाएगा; और यदि कहीं गड़बड़ी है तो जिम्मेदारी तय होना भी जरूरी है।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव के गृह जिले में व्यवस्था पर सवाल
खास बात यह है कि यह मामला उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव के गृह जिले बिलासपुर से जुड़ा है। ऐसे में शहर में चल रहे नगरीय निर्माण कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवाल प्रशासन के लिए और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
जनता का सीधा सवाल है—जब सड़क पर मिट्टी जमा है, गड्ढा दो दिन से खुला है और काम भी बंद है, तो जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर कार्रवाई कब करेंगे?
अब जरूरत सिर्फ बयान की नहीं, बल्कि मौके की तकनीकी जांच, निर्माण गुणवत्ता की जांच, सुरक्षा व्यवस्था की जांच, सड़क पर डाली गई मिट्टी के निपटारे और ठेकेदार के भुगतान की प्रक्रिया की जांच की है।
जनता के पैसों से बनने वाली नाली अगर जनता के लिए ही खतरा बन जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है—आखिर विकास के नाम पर यह कैसा निर्माण और किसकी निगरानी में?







