मुख्यमंत्री जी! 845 खिलाड़ियों के राज्य स्तरीय आयोजन में व्यवस्था की खुली पोल? जमीन पर बैठकर भोजन, फटे गद्दे-बिना कवर की तकिया—तस्वीरें मचा रहीं सवाल

संयुक्त संचालक अश्वनी कुमार भारद्वाज के दावों पर उठे सवाल

बिलासपुर। न्यायधानी में 26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता का आगाज निश्चित रूप से गौरव का अवसर है। प्रदेश के पांचों संभागों से 845 खिलाड़ी और 150 ऑफिशियल बिलासपुर पहुंचे हैं। पुलिस ग्राउंड में मार्चपास्ट, खिलाड़ियों का उत्साह और खेल भावना—इन सबने आयोजन को भव्यता दी। लेकिन भव्य उद्घाटन के पीछे यदि व्यवस्थाओं की तस्वीर असहज सवाल खड़े कर रही है, तो उन सवालों को उठाना भी उतना ही जरूरी है।

क्योंकि खेल सिर्फ मैदान में नहीं खेला जाता, खिलाड़ियों के सम्मान और सुविधाओं की व्यवस्था में भी खेल भावना दिखाई देनी चाहिए।

उद्घाटन मंच से संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर अश्वनी कुमार भारद्वाज ने आयोजन की रूपरेखा बताते हुए कहा कि खिलाड़ियों और ऑफिशियल के लिए आवास, शुद्ध पेयजल, गुणवत्तापूर्ण भोजन और परिवहन की समुचित व्यवस्था की गई है। व्यवस्थाओं को सुचारू रखने के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों की विशेष ड्यूटी लगाए जाने की बात भी कही गई।

दावा सुनने में शानदार है।

लेकिन सवाल यह है कि जमीन पर तस्वीर कैसी है?

भोजन की थाली में व्यवस्था का सच क्यों तलाशना पड़ रहा है?

लाला लाजपतराय परिसर में भोजन के दौरान सामने आई स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। न्यूज़ हब इनसाइट के कैमरे में बालिकाएं  जमीन पर बैठकर भोजन करती नजर आईं और वे खेल मैदान से पैदल वहां तक पहुंची थीं।

अगर तस्वीरें यही स्थिति दिखाती हैं, तो यह सिर्फ बैठने की व्यवस्था का सवाल नहीं है। ये वे बच्चे हैं जो अपने जिले और संभाग का प्रतिनिधित्व करने आए हैं। उनसे हम पदक, अनुशासन और खेल भावना की उम्मीद करते हैं, तो बदले में उन्हें सम्मानजनक भोजन व्यवस्था और बुनियादी सुविधाएं देना भी हमारी जिम्मेदारी है।

और भोजन में परोसी जा रही दाल में मिर्च का तड़का इतना तीखा होने की शिकायत सामने आती है, तो आयोजकों को यह भी देखना चाहिए कि अलग-अलग उम्र के बच्चों के लिए भोजन वास्तव में कितना उपयुक्त और गुणवत्तापूर्ण है।

गद्दा-चादर की जगह सवालों की चादर क्यों?

सबसे गंभीर सवाल खिलाड़ियों के आवास को लेकर है।

बाहर से आए खिलाड़ियों के लिए गद्दे, तकिए और चादर की व्यवस्था की गई, लेकिन सामने आई जानकारी के मुताबिक कई गद्दे फटे और गंदे दिखाई दिए तथा बिस्तर से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर भी शिकायतें हैं।

यहां सवाल सीधा है—

क्या राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में आने वाले बच्चों के लिए न्यूनतम स्वच्छ और सुरक्षित सोने की व्यवस्था सुनिश्चित करना भी कठिन है?

यदि आयोजन की तैयारी पहले से थी, खिलाड़ियों की संख्या पहले से तय थी और अधिकारियों की ड्यूटी भी लगाई गई थी, तो फिर ऐसी स्थिति क्यों बनी?

टी-शर्ट और हाफ पैंट भी सवालों के घेरे में

खिलाड़ियों को दी गई टी-शर्ट और हाफ पैंट की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। यदि खिलाड़ियों को दी जाने वाली किट की गुणवत्ता अपेक्षित मानक की नहीं है, तो इसकी जांच होनी चाहिए।

क्योंकि यह केवल कपड़े का सवाल नहीं है।

यह सरकारी आयोजन में खर्च होने वाले सार्वजनिक धन और उसकी गुणवत्ता का सवाल है।

अतिथियों की लंबी सूची, लेकिन असली VIP कौन?

कार्यक्रम में बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला, क्रेडा अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी, महापौर पूजा विधानी और जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी उपस्थित रहे। वहीं केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह, मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया, कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव और छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम अध्यक्ष राजा पाण्डेय के भी शामिल होने की जानकारी थी, लेकिन कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति नजर नहीं आई।

हालांकि किसी जनप्रतिनिधि का कार्यक्रम में उपस्थित होना या न होना अपने आप में व्यवस्था की गुणवत्ता का पैमाना नहीं है। असली VIP तो वे 845 खिलाड़ी हैं, जिनके लिए यह आयोजन किया गया है।

और यही बात आयोजकों को सबसे पहले याद रखनी चाहिए।

भाषण और व्यवस्था के बीच का फासला खत्म होना चाहिए

यह संपादकीय किसी अधिकारी या विभाग को कटघरे में खड़ा करने के लिए नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने के लिए है।

यदि व्यवस्थाएं वास्तव में गुणवत्तापूर्ण थीं, तो आयोजक सामने आकर बताएं—

  • खिलाड़ियों के लिए भोजन की गुणवत्ता जांचने की व्यवस्था क्या थी?
  • आवास में उपलब्ध कराए गए गद्दे-तकिए-चादरों की गुणवत्ता किसने जांची?
  • कितने खिलाड़ियों के लिए कितने बिस्तरों की व्यवस्था की गई?
  • खिलाड़ियों को मैदान से भोजन स्थल तक लाने के लिए परिवहन व्यवस्था क्यों पर्याप्त नहीं रही?
  • खिलाड़ियों को दी गई किट की खरीद किस प्रक्रिया से हुई और उसका गुणवत्ता परीक्षण किसने किया?
  • आयोजन के लिए स्वीकृत बजट और वास्तविक खर्च कितना है?
  • भोजन, आवास, परिवहन और किट की जिम्मेदारी किन अधिकारियों/एजेंसियों को दी गई है?

इन सवालों के जवाब आरोप नहीं, पारदर्शिता का हिस्सा होंगे।

खिलाड़ियों को भाषण नहीं, बेहतर व्यवस्था चाहिए

बिलासपुर को राज्य स्तरीय खेल आयोजन की मेजबानी मिली है। यह न्यायधानी के लिए सम्मान की बात है। आयोजन की सफलता सिर्फ मंच की सजावट, मार्चपास्ट और अतिथियों के भाषण से तय नहीं होगी।

सफल आयोजन वह होगा जिसमें खिलाड़ी मैदान पर पसीना बहाए और मैदान के बाहर उसे सम्मान, स्वच्छ बिस्तर, पौष्टिक भोजन, स्वच्छ पानी और सुरक्षित परिवहन मिले।

आखिर ये खिलाड़ी किसी होटल में मेहमान बनकर नहीं आए हैं। ये छत्तीसगढ़ के भविष्य के खिलाड़ी हैं। इसलिए सवाल व्यवस्था से है, व्यक्ति से नहीं। सवाल जवाबदेही का है, राजनीति का नहीं। और सवाल इसलिए जरूरी है क्योंकि सरकारी आयोजन में खर्च जनता का पैसा होता है।

अंतिम सवाल

मंच से कहा गया—“आवास, शुद्ध पेयजल, गुणवत्तापूर्ण भोजन और परिवहन की समुचित व्यवस्था है।”

अगर जमीन पर तस्वीर इसके विपरीत है, तो जिम्मेदारों को तय करना होगा—

“क्या आयोजन की फाइल में व्यवस्था पूरी है, या खिलाड़ियों की थाली, बिस्तर और सफर में भी वह पूरी दिखाई दे रही है?”

क्योंकि खेल के मैदान में हार-जीत खिलाड़ी तय करता है, लेकिन आयोजन की गुणवत्ता की जीत-हार आयोजक तय करते हैं।

  • पंकज खण्डेलवाल

    Pankaj Khandelwal is the Founder & Principal Editor of News Hub Insight (NHI). He is an independent journalist with expertise in governance, education, public policy, civic issues and investigative reporting. His reporting is based on accuracy, public interest and responsible journalism. Every article published under his editorial supervision follows News Hub Insight's Editorial Policy, Fact Check Policy and Correction Policy.

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