RTI का उल्लंघन यानी सुशासन पर सीधा हमला: सीएम साहब! सूचना दबाने वाले अफसरों को तत्काल करें सस्पेंड!
‘नियम दरकिनार, अफसर बेपरवाह’—सहायक आयुक्त चंदेल की ढर्रेबाज़ी से सरकार की साख पर बट्टा!
आदिवासी विभाग के विवादित AC संजय चंदेल को RTI कानून का खौफ नहीं, 30 दिन बीते… जवाब गायब!
बिलासपुर: पारदर्शिता और सुशासन का ढिंढोरा पीटने वाले प्रशासनिक तंत्र में ‘सूचना का अधिकार’ (RTI) दम तोड़ता नजर आ रहा है। ताजा मामला आदिवासी विकास विभाग का है, जहां सहायक आयुक्त संजय चंदेल की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। आरटीआई कानून के तहत तय 30 दिनों की समयसीमा बीत जाने के बावजूद आवेदक को चाही गई जानकारी मुहैया नहीं कराई गई है।
अधिकारियों की बेरुखी से जनता में आक्रोश
सरकार एक तरफ आरटीआई को आम जनता का सबसे बड़ा हथियार बताती है, वहीं दूसरी तरफ जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी इसे ठेंगा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। 30 दिन पूरा होने के बाद भी जवाब न देना न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि यह मंशा पर भी सवाल खड़े करता है। जानकारी छिपाने की इस ‘अफसरशाही ढर्रे’ से आवेदक का समय पर काम नहीं हो पा रहा है, जिससे शासन और प्रशासन के प्रति आम जनता का आक्रोश भड़कना स्वाभाविक है।
क्या कुछ छिपाने की है कोशिश?
समय पर जानकारी न मिलने से यह आशंका भी बलवती हो रही है कि क्या विभाग के भीतर ऐसे दस्तावेज हैं जिन्हें उजागर होने से बचाने का प्रयास किया जा रहा है? जब सूचना का अधिकार अधिनियम खुद यह तय करता है कि 30 दिनों के भीतर जवाब मिलना आवेदक का कानूनी हक है, तब सहायक आयुक्त स्तर के जिम्मेदार अधिकारी का यह ढुलमुल रवैया बेहद चिंताजनक है।
अब देखना यह होगा कि इस मामले में उच्चाधिकारी संज्ञान लेकर कोई ठोस कदम उठाते हैं या फिर आरटीआई आवेदनों पर यूं ही धूल जमती रहेगी।







