बिलासपुर: दुनिया के महान जादूगर आनंद के जन्मदिन 3 जनवरी पर विशेष …

प्रदेश से उठे आनंद ने विश्व भर को दी खुशी

बिलासपुर: जिन कुछ लोगों ने जबलपुर मध्यप्रदेश और देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है, उनमें ‘जादूगर आनंद’ का नाम प्रथम पंक्ति की सूची में है। इस जादूगर के मायाजाल ने समूची दुनिया को अपने भ्रमजाल में फंसा उन्हें खुशी का असीम आकाश दिया है। म.प्र की संस्कारधानी कहे जाने वाले जबलपुर की इस शख्सियत के जादू की यदि दीवानी पूरी दुनिया है, तो इसका कारण जादू के प्रति उनका समर्पण भी है। आनंद के खून में जादू है। बचपन से वे जादूगर बनने का सपना देखते थे। इस सपने को साकार करने में उन्होंने जीवन खपा दिया। मंचीय शो के साथ अंधी यात्रा और तकनीकी दृष्टि से ‘मेगा फायर शो’ ने भी उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित किया है। ये संयोग ही है कि इस बार अपने जन्मदिन पर वे अपने गृहनगर जबलपुर मे ही हैं। जन्मदिन पर उनके दुनिया भर में फैले चाहने वालों ने उन्हें बधाइयां प्रेषित किए हैं।

अनोखा रहा जादू का सफर–

जादूगर आनंद का जादुई सफर मदारियों के खेल से शुरू हुआ। वर्तमान में यह मंच के भव्यतम स्वरूप से लेके फायर शो तक जा पहुंचा है। इसका विश्राम किस समृद्धि पर होगा, ये आनंद भी नहीं जानते। वे कहते हैं कि मेरा काम तो जादू की साधना करना है। गीता दर्शन को मानते हुए मैं तो कर्म विधान में जुटा हूं। जो भी फल मिलेगा, उसे अंगीकार कर लूंगा। आनंद का जन्म तो जबलपुर में हुआ। लेकिन उनका जादुई सफर शुरू हुआ रायपुर से। आनंद ने बाल्यावस्था में ही सोच लिया था कि उन्हें जादूगर के अलावा और कुछ नहीं बनना है। परिजनों के विरोध, डांट-फटकार, मार-पीट के बाद भी आनंद ने अपने संकल्प से समझौता नहीं किया। और फिर एक समय ऐसा भी आया जब उनका संकल्प सिद्ध हो गया। आनंद ने रायपुर से अपनी जादूकला का श्रीगणेश किया और आज विश्व के सातों महाद्वीपों का वे चक्कर लगा जबलपुर तथा प्रदेश का नाम विश्व में रोशन कर चुके हैं।

मायूस चेहरों पर झलकता है आनंद-

जादूगर आनंद का जादुई पिटारा ऐसा है, कि मायूस और दुखी चेहरों पर भी आनंद की लहर लहराने लगती है। उन्हें मंच पर देख लोग सब कुछ भूल जाते हैं। उन्हें सिर्फ एक ही शब्द याद रहता है और वो है जादुई ‘आनंद’। उनके जादुई मनोरंजन में सदैव नवीनता बनीं रहे, इसके लिए वे हर शहर में कई नए और चौकाने वाले आयटम जोड़ लेते हैं। दुनिया में 40 हजार हाउस फुल शो का रिकॉर्ड अपने नाम करने वाले आनंद की जादुई यात्रा में कई सम्मानित पड़ाव आए हैं। अनेकों बार विभिन्न राज्यपाल, मुख्यमंत्री, संतगण, फिल्म-क्रिकेट स्टार आदि बतौर दर्शक उनके सामने बैठे हैं। सभी ने आनंद के आर्ट को सराहा है। किसी योगी की तरह साक्षी भाव रखते हुए वे प्रशंसा-आलोचना को गले लगाते हैं। उन्हें सबसे ज्यादा पसंद यदि कुछ है, तो वो है हंसते-खिलखिलाते दर्शकों की तालियों का शोर।

इस एक बात का दुख भी-

आनंद इस बात से दुखी भी हैं कि जादू को मनोरंजन तो माना जाता है, पर इसे कला के रूप में वह सम्मान नहीं मिला, जिसकी ये विधा हकदार है। खेल, कला, साहित्य सहित हर विधा सम्मान की यदि हकदार हैं तो जादू क्यों नहीं। जबलपुर से खास प्रेम करने वाले जादूगर आनंद यहां मैजिक अकादमी बनाने के पक्षधर हैं। यही नहीं वे हर स्टेट की कैपिटल में मैजिक अकादमी चाह रखते हैं। उनके प्रयासों से राजस्थान में तो मामला काफ ी आगे बढ़ गया है। वे कहते हैं कि प्रतिभा की खान कहे जाने वाले भारत की ‘कला-उर्वरा’ धरती ने विभिन्न विधा के अनेक हीरे उगले हैं। ये दीगर बात हैं कि इन्हें समुचित मंच नहीं मिलता।

आनंद कहते हैं कि जबलपुर उनके दिल-दिमाग दोनों के करीब है। ये दीगर बात है कि व्यस्तता के चलते जबलपुर में वे ज्यादा शो नहीं कर पाते। सगर्व वे दावा करते हैं कि जबलपुर जैसा शहर और भारत जैसा देश दुनिया में कहीं और नहीं। देश के कोने-कोने में फैले कलाकारों को मंच देना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।

उक्त लेख शो के प्रबंधक मदन भारती से मिली जानकारी के आधार पर लिखा गया है।

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