बिलासपुर में राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का भव्य आयोजन — साहित्य, सिनेमा और समाज पर मंथन, विद्वानों ने रखे धारदार विचार

बिलासपुर। शासकीय बिलासा कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बिलासपुर में 17 मार्च को दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का शानदार आगाज़ हुआ। हिन्दी, उर्दू, संस्कृत एवं संगीत विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी ने शिक्षा जगत में एक नई बौद्धिक ऊर्जा का संचार किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि आचार्य ए.डी.एन. वाजपेयी (कुलपति, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय), विशिष्ट अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक (पूर्व अध्यक्ष, राजभाषा आयोग एवं कुलपति, थावे विद्यापीठ), राघवेन्द्रधर दीवान (सेवानिवृत्त अधिकारी एवं समाजसेवी), डॉ. राजकुमार सचदेव एवं श्री दीपक शेखर प्रेम (क्षेत्रीय प्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक, बिलासपुर) की गरिमामयी उपस्थिति में दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।

 सरस्वती वंदना से गूंजा सभागार

छात्राओं द्वारा प्रस्तुत मधुर सरस्वती वंदना और राष्ट्रगीत ने वातावरण को आध्यात्मिक और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कर दिया। इसके बाद अतिथियों का पुष्पगुच्छ से स्वागत किया गया।

साहित्य से सिनेमा तक — विचारों की गहराई

हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. हरणी रानी अग्रवाल ने अतिथियों का परिचय देते हुए सिनेमा और साहित्य के बदलते आयामों पर प्रकाश डाला। प्राचार्य ने अपने उद्बोधन में माखनलाल चतुर्वेदी की रचना “पुष्प की अभिलाषा” का उल्लेख करते हुए गीता के कर्म सिद्धांत और रामायण की नैतिकता को जीवन का आधार बताया। उन्होंने मुंशी प्रेमचंद से लेकर मिर्ज़ा ग़ालिब तक की साहित्यिक यात्रा को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताया।

 विमर्शों का नया दृष्टिकोण

डॉ. विनय कुमार पाठक ने नारी विमर्श, दलित विमर्श, अस्मितामूलक लेखन और विकलांग विमर्श पर गहन विचार रखते हुए समाज के हाशिए पर खड़े वर्गों को मुख्यधारा में लाने पर जोर दिया। उन्होंने किन्नर और दिव्यांग चेतना पर नई अवधारणाओं को सामने रखा।

 “2016 से 2026 तक साहित्य की नई यात्रा”

डॉ. राजकुमार सचदेव ने साहित्यिक यात्रा को “स्टार्टअप युग” से जोड़ते हुए लघुकथा, योग और पारिवारिक मूल्यों के संतुलन पर जोर दिया। वहीं राघवेन्द्रधर दीवान ने सामाजिक परिस्थितियों और साहित्य की उपयोगिता को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

 सिनेमा और समाज का संबंध

मुख्य अतिथि आचार्य ए.डी.एन. वाजपेयी ने साहित्य, सिनेमा और समाज के गहरे संबंध को स्पष्ट करते हुए पुराने सिनेमा से लेकर वर्तमान फिल्मों तक का विश्लेषण किया। उन्होंने दार्शनिक ओशो के विचारों का उल्लेख करते हुए समकालीन फिल्मों जैसे “छावा” और “आर्टिकल 370” पर भी चर्चा की।

 शोध वाचन और सांस्कृतिक रंग

तृतीय सत्र में ज्वाइंट कमिश्नर अर्चना मिश्रा का आगमन हुआ, जहां उन्होंने उर्दू भाषा पर शोध वाचन प्रस्तुत किया। उन्होंने “घराना” शब्द की व्याख्या करते हुए छात्राओं को प्रेरित किया और संगीत मंच पर भी उत्कृष्ट प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के अंत में उन्हें श्रीफल और शॉल भेंटकर सम्मानित किया गया।

 प्रथम सत्र का समापन

डॉ. हेमंत पाल घृतलहरे ने प्रथम सत्र के समापन की घोषणा की। पूरे आयोजन में विद्यार्थियों और विद्वानों ने गहरी रुचि के साथ सहभागिता निभाई।

यह संगोष्ठी केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं, बल्कि साहित्य, समाज और सिनेमा के त्रिवेणी संगम का जीवंत उदाहरण बनकर उभरी। यहां उठे विचार आने वाले समय में शोध और समाज दोनों को नई दिशा देने वाले साबित होंगे।

  • पंकज खण्डेलवाल

    Pankaj Khandelwal is the Founder & Principal Editor of News Hub Insight (NHI). He is an independent journalist with expertise in governance, education, public policy, civic issues and investigative reporting. His reporting is based on accuracy, public interest and responsible journalism. Every article published under his editorial supervision follows News Hub Insight's Editorial Policy, Fact Check Policy and Correction Policy.

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