कोरबा। दीपका स्थित शासकीय महाविद्यालय एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर के बौद्धिक संगम का केंद्र बनने जा रहा है। दिनांक 30 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को यहां 20वीं एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देशभर से विद्वान, शिक्षाविद, शोधार्थी एवं विषय विशेषज्ञ भाग लेंगे।
यह महत्वपूर्ण आयोजन शासकीय महाविद्यालय दीपका एवं अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद, बिलासपुर के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। संगोष्ठी का विषय है— “भारतीय ज्ञान परंपरा की कसौटी पर विकलांग-विमर्श का पुनर्मूल्यांकन”
सुबह 9:30 बजे होगा शुभारंभ, होगा विचारों का महाकुंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 9:30 बजे महाविद्यालय परिसर में होगा। इस दौरान विभिन्न राज्यों से आए विद्वानों के बीच गहन विचार-विमर्श और ज्ञान का आदान-प्रदान होगा, जो इस आयोजन को और अधिक सार्थक बनाएगा।
कई दिग्गज हस्तियां करेंगी शिरकत
इस गरिमामयी आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्य एवं उद्योग, श्रम, आबकारी एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्री लखनलाल देवांगन उपस्थित रहेंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे डॉ. विनय कुमार पाठक (पूर्व अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग – राज्यमंत्री दर्जा एवं कुलपति, थावे विद्यापीठ, बिहार)
विशिष्ट अतिथि के रूप में
- पूर्व न्यायाधीश, उच्च न्यायालय न्यायमूर्ति चंद्रभूषण बाजपेयी
- राष्ट्रीय महामंत्री, अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद मदनमोहन अग्रवाल
- जनरल मैनेजर, गेवरा प्रोजेक्ट अरुण त्यागी
साथ ही समारोह भूषण के रूप में
कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
पुस्तक विमोचन बनेगा आकर्षण का केंद्र
इस अवसर पर “विकलांग-विमर्श: विविध संदर्भ” शीर्षक पुस्तक का भव्य विमोचन भी किया जाएगा, जिसका संपादन डॉ. पायल लिल्हारे (मध्यप्रदेश) द्वारा किया गया है। यह पुस्तक विकलांग-विमर्श के विविध पहलुओं को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है।
आयोजकों का संदेश
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. ममता ठाकुर ने इसे भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में विकलांग-विमर्श को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
वहीं, संगोष्ठी के संयोजक डॉ. गजेंद्र तिवारी ने शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं जागरूक नागरिकों से अधिकाधिक संख्या में सहभागिता कर आयोजन को सफल बनाने का आह्वान किया है।
समाज और शिक्षा दोनों को मिलेगा नया दृष्टिकोण
यह संगोष्ठी न केवल अकादमिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगी, बल्कि समाज में समावेशिता, संवेदनशीलता और समानता के नए आयाम स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।
“ज्ञान का संगम, विचारों का मंथन — दीपका बनेगा राष्ट्रीय बौद्धिक केंद्र”















