बिलासपुर। ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल विवाद अब एक बड़े प्रशासनिक टेस्ट में बदल गया है। जहां एक ओर केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने इस पूरे मामले को “विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विश्वासघात” मानते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, वहीं अब सबकी निगाहें छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकास शील पर टिक गई हैं।
CBSE का वादा, CG बोर्ड का दबाव—भड़के पालक
व्यापार विहार स्थित ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल पर आरोप है कि
-CBSE पैटर्न से पढ़ाई और परीक्षा का भरोसा देकर एडमिशन लिया गया
– लेकिन अब अचानक छत्तीसगढ़ बोर्ड में बैठने के लिए दबाव बनाया जा रहा है
इससे 40 से अधिक अभिभावकों में आक्रोश है और बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है।
मंत्री का सख्त पत्र—जांच और कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश

मंत्री तोखन साहू ने मुख्य सचिव को लिखे पत्र में साफ कहा है:
-सीनियर अधिकारियों की टीम गठित कर तत्काल जांच हो
-जांच निष्पक्ष और पारदर्शी हो
– दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए
उन्होंने यह भी कहा—
-“बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगा।”
अब असली सवाल: मुख्य सचिव कितनी गंभीरता दिखाएंगे?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो गया है—
– क्या मुख्य सचिव विकास शील इस पत्र को सामान्य औपचारिकता मानेंगे
– या फिर इसे हाई-प्रायोरिटी केस बनाकर त्वरित कार्रवाई करेंगे?
क्योंकि
– मामला सीधे 40+ बच्चों के भविष्य से जुड़ा है
– और
– इसमें शिक्षा विभाग की जवाबदेही भी तय हो सकती है
प्रशासन की साख दांव पर
अगर इस मामले में
-तुरंत जांच और सख्त कार्रवाई होती है
तो यह प्रशासन की संवेदनशीलता और जवाबदेही को दर्शाएगा
लेकिन अगर
– मामला फाइलों में दब गया
तो यह न सिर्फ प्रभावित परिवारों के साथ अन्याय होगा, बल्कि
-पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करेगा
अब फैसला प्रशासन के हाथ में
मंत्री तोखन साहू ने अपना काम कर दिया है—
– अब बारी है मुख्य सचिव विकास शील की
कि वे इस मुद्दे को
-सिर्फ एक शिकायत मानते हैं
या
-बच्चों के भविष्य की लड़ाई समझकर निर्णायक कार्रवाई करते हैं















