CG : 7 साल का रहस्य उजागर! आईपीएस रतनलाल डांगी और एसआई की पत्नी की ‘नजदीकियों’ ने हिलाया पूरा सिस्टम

रुतबे की वर्दी या रिश्ता का जाल? — आईजी रतनलाल डांगी और एसआई की पत्नी की कहानी ने उठाए कई सवाल

छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे में इन दिनों एक ऐसा तूफान उठ खड़ा हुआ है, जिसने पूरे राज्य की वर्दी के अनुशासन और गरिमा पर सवालों की आंधी ला दी है। बिलासपुर से जुड़ा यह मामला किसी मामूली पुलिसकर्मी का नहीं, बल्कि राज्य के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी का है — जिन पर एक एसआई की पत्नी ने यौन शोषण और मानसिक उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

यह मामला जितना संवेदनशील है, उतना ही चौंकाने वाला भी। क्योंकि जिस महकमे से महिलाओं की सुरक्षा और न्याय की उम्मीद की जाती है, वहीं की एक महिला पुलिसकर्मी की पत्नी न्याय की गुहार लेकर अब डीजीपी तक पहुंची है। यह न केवल विभागीय अनुशासन की जड़ों को हिला देने वाला प्रसंग है, बल्कि पुलिस के भीतर पनपती उस खामोश सत्ता संस्कृति का आईना भी है, जिसमें ऊंचे पद और प्रभाव के आगे निचले पदों की आवाजें अक्सर दब जाती हैं।

आरोपों की फेहरिस्त लम्बी है — जबरन संबंध, ट्रांसफर की धमकी, मानसिक शोषण और निजी जिंदगी पर डिजिटल नजरबंदी। महिला का दावा है कि उसके पास इसके डिजिटल सबूत हैं। वहीं आईपीएस डांगी ने इन सबको नकारते हुए खुद को ब्लैकमेलिंग का शिकार बताया है। सवाल यह नहीं कि कौन सच बोल रहा है, सवाल यह है कि ऐसे मामलों में सच्चाई सामने आने तक कितनी और वर्दियों का सम्मान दांव पर लगता रहेगा?

डांगी 2003 बैच के अधिकारी हैं। जिन जिलों में उन्होंने कानून-व्यवस्था का जिम्मा संभाला, वहीं, आज उन पर खुद अनुशासनहीनता और नैतिक पतन के आरोप हैं। यह विडंबना ही है कि जो अफसर दूसरों को आचरण और कानून का पाठ पढ़ाते रहे, आज उन्हीं पर “मर्यादा लांघने” का आरोप है।

मुख्यमंत्री ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है, जो स्वागतयोग्य कदम है। लेकिन इस आश्वासन के साथ एक और सवाल उठता है — क्या पुलिस महकमे के भीतर इतनी पारदर्शिता और हिम्मत है कि वह अपने ही सीनियर अफसर के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर सके? या यह मामला भी कई अन्य “संवेदनशील फाइलों” की तरह धीरे-धीरे धूल फांकता रह जाएगा?

छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे में हड़कंप मचाने वाले आईपीएस रतनलाल डांगी विवाद में अब नया मोड़ आ गया है। सूत्रों के मुताबिक, डांगी ने सब-इंस्पेक्टर की पत्नी की शिकायत से पहले ही डीजीपी अरुण देव गौतम को 14 बिंदुओं वाला विस्तृत पत्र भेज दिया था, जिसमें उन्होंने खुद को ब्लैकमेलिंग और मानसिक प्रताड़ना का शिकार बताया है। अपने पत्र में डांगी ने महिला और उसके सहयोगियों पर न केवल झूठे आरोप गढ़ने बल्कि धमकी और दबाव बनाकर निजी लाभ उठाने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया है। सूत्रों का कहना है कि डांगी ने इस पत्र में कई चौंकाने वाले तथ्य और घटनाक्रमों का ज़िक्र किया है, जिनसे पूरा मामला एकदम पलट सकता है। अब सवाल यह उठ रहा है कि – क्या यह “मीटू” की आड़ में ब्लैकमेलिंग का खेल था या वर्दी के भीतर छिपे सच का पर्दाफाश?

यह सिर्फ एक अफसर पर आरोप का मामला नहीं है, बल्कि यह उस सिस्टम पर भी इल्ज़ाम है जो सत्ता और रुतबे के नशे में इंसानियत की आवाज़ दबा देता है। अगर जांच में महिला के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह “पुलिस की साख” पर अब तक का सबसे गहरा धब्बा होगा। और अगर आरोप झूठे निकलते हैं, तो यह साबित करेगा कि व्यक्तिगत रंजिश और ब्लैकमेलिंग का नया हथियार अब “मीटू” की आड़ में इस्तेमाल हो रहा है।

हर हाल में यह मामला एक नजीर बने — ताकि भविष्य में कोई भी “पद की ताकत” को “व्यक्ति की कमजोरी” बनाने की हिम्मत न करे।

छत्तीसगढ़ पुलिस को अब फैसला करना होगा — वह अपने अफसरों को बचाएगी या अपनी वर्दी का मान रखेगी।

  • पंकज खण्डेलवाल

    Pankaj Khandelwal is the Founder & Principal Editor of News Hub Insight (NHI). He is an independent journalist with expertise in governance, education, public policy, civic issues and investigative reporting. His reporting is based on accuracy, public interest and responsible journalism. Every article published under his editorial supervision follows News Hub Insight's Editorial Policy, Fact Check Policy and Correction Policy.

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