छत्तीसगढ़ के लोक शिक्षण संचालनालय ने गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को एक सप्ताह के भीतर मूल पदस्थापना स्थल पर लौटने और ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने का निर्देश देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि आदेश का पालन नहीं करने वालों का जुलाई माह का वेतन रोक दिया जाएगा। पहली नजर में यह निर्णय प्रशासनिक अनुशासन स्थापित करने की दिशा में एक कठोर लेकिन आवश्यक कदम प्रतीत होता है।
सरकारी व्यवस्था में संलग्नीकरण (अटैचमेंट) हमेशा से विवाद का विषय रहा है। कई कर्मचारी वर्षों तक मूल पदस्थापना छोड़कर अन्य कार्यालयों में कार्य करते रहते हैं, जिससे जिन संस्थानों में उनकी वास्तविक आवश्यकता होती है, वहां कर्मचारियों की कमी बनी रहती है। इसका सीधा असर शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यों पर पड़ता है। ऐसे में सरकार यदि इस व्यवस्था को समाप्त कर कर्मचारियों को उनके मूल कार्यस्थल पर भेजना चाहती है, तो इसका स्वागत होना चाहिए।
लेकिन सवाल यह भी है कि क्या केवल वेतन रोकने की चेतावनी से समस्या का स्थायी समाधान निकल जाएगा? अनेक मामलों में कर्मचारियों का संलग्नीकरण स्वयं विभागीय आदेशों पर हुआ था। यदि किसी कर्मचारी को वर्षों तक एक स्थान पर कार्य कराया गया है, तो अचानक उसे सात दिन के भीतर लौटने का आदेश देना व्यावहारिक कठिनाइयाँ भी पैदा कर सकता है। इसलिए अनुशासन के साथ मानवीय संवेदनाओं का संतुलन भी आवश्यक है।
सरकार की मंशा स्पष्ट है कि शासकीय व्यवस्था नियमों के अनुसार चले और कोई भी कर्मचारी मनमाने तरीके से कार्यस्थल न चुने। लेकिन इसके साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली पूरी तरह तकनीकी रूप से सक्षम हो, कर्मचारियों को आवश्यक सुविधाएँ मिलें और यदि किसी के सामने वास्तविक प्रशासनिक या पारिवारिक समस्या हो तो उसकी सुनवाई भी हो।
यह आदेश केवल कर्मचारियों के लिए नहीं, बल्कि अधिकारियों के लिए भी एक संदेश है कि भविष्य में अनावश्यक संलग्नीकरण की संस्कृति पर रोक लगनी चाहिए। यदि नियमों का पालन शुरुआत से ही किया जाता, तो आज इतनी सख्ती की आवश्यकता शायद नहीं पड़ती।
अनुशासन जरूरी है, लेकिन न्यायपूर्ण अनुशासन उससे भी अधिक जरूरी है। सरकार को नियमों के पालन के साथ पारदर्शिता, संवाद और व्यावहारिकता को भी समान महत्व देना होगा। तभी यह फैसला केवल वेतन रोकने का आदेश नहीं, बल्कि प्रशासनिक सुधार का प्रभावी माध्यम बन सकेगा।
नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के बैकलॉग पदों को भरने के लिए राज्य सरकार द्वारा विशेष भर्ती अभियान शुरू किए जाने के फैसले का छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति/जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स) ने स्वागत किया है। हालांकि, संगठन ने स्पष्ट किया है कि केवल भर्ती अभियान पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि वर्ष 2003 से अब तक लंबित सभी बैकलॉग पदों की पारदर्शी और विभागवार गणना कराकर वास्तविक रिक्तियों का खुलासा किया जाना चाहिए। सामान्य प्रशासन विभाग के उप सचिव एस.के.…
योग दिवस पर छत्तीसगढ़ सरकार ने जारी की वीआईपी सूची, सभी जिलों के लिए अतिथि तय CG। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2026 के अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में आयोजित होने वाले योग कार्यक्रमों के लिए मुख्य अतिथियों की सूची जारी कर दी है। शासन द्वारा जारी आदेश में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद और विधायकों को विभिन्न जिलों में मुख्य अतिथि के रूप में नामांकित किया गया है। जारी आदेश के अनुसार बिलासपुर जिले में…