बिलासपुर में महाराष्ट्रीयन परिवारों में महालक्ष्मी पूजन की धूम

बिलासपुर। भाद्रपद माह की षष्ठी से लेकर अष्टमी तक नगर के महाराष्ट्रीयन परिवारों में महालक्ष्मी पूजन का विशेष आयोजन धूमधाम से शुरू हो गया है। परंपरा अनुसार 31 अगस्त से 2 सितंबर तक घर-घर में देवी महालक्ष्मी की स्थापना की गई।

विवाहित महिलाएँ इस पूजन का पालन अपने सौभाग्य, बच्चों की उन्नति और परिवार की समृद्धि के लिए करती हैं। पहले दिन ज्येष्ठा और कनिष्ठा देवियों का आगमन निश्चित मुहूर्त में हुआ। उनके साथ पुत्र और पुत्री की प्रतिमाओं की भी स्थापना की गई। प्रवेश द्वार से पूजा स्थल तक देवी के पदचिह्नों की रंगोली सजाई गई और स्थापना स्थल पर गेहूं–चावल की ओळ रखकर परंपरा निभाई गई।

पूजन में 16 का विशेष महत्व रहा। देवियों का 16 चक्र धागों से सुत tying, 16 श्रृंगार, 16 प्रकार के फूल, पत्तियाँ, आभूषण, फल, मिठाई, नमकीन, चटनियाँ और सब्जियाँ चढ़ाई गईं। सप्तमी के दिन महापूजा एवं विशाल महाभोग का आयोजन किया जाएगा, जिसमें रिश्तेदार और समुदायजन एकत्र होंगे। इस अवसर पर परंपरागत 56 भोग भी कमल के पत्तों या थालियों में परोसे जाएंगे।

अंतिम दिन सुहागन महिलाओं के लिए हल्दी–कुमकुम कार्यक्रम और पुत्र कामना पूजा संपन्न होगी।

बिलासपुर नगर में संदीप चोपड़े, दत्तात्रय शिंगले, प्रवीण दिघरस्कार, अतुल चोपड़े, बालू दिग्रस्कार, श्रीकांत शिंगले, अभय विठालकर, श्रीकांत वलिम्बे, चंद्रप्रकाश देवरस सहित अनेक घरों में देवी पूजन की धूम देखने को मिल रही है।

पूरे तीन दिनों तक बिलासपुर के महाराष्ट्रीयन परिवारों में भक्ति और परंपरा का संगम दिखाई देगा।

  • Related Posts

    बुद्ध पूर्णिमा : प्राचीन प्रकाश, आधुनिक आवश्यकता और मनुष्य होने की शाश्वत चेतना

    ✍ डॉ. भूपेन्द्र धर दीवान, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ ( त्वचाविज्ञान आधारित बहु-बुद्धिमत्ता परीक्षण विशेषज्ञ एवं मानसिकमाप परामर्शदाता ) प्रस्तावना : एक तिथि, अनेक आलोक वैशाख मास की पूर्णिमा भारतीय सभ्यता में केवल खगोलीय पूर्णता का क्षण नहीं, बल्कि चेतना की पराकाष्ठा का प्रतीक है। परंपरागत दृष्टि के अनुसार इसी दिन गौतम बुद्ध का जन्म, बोधि-प्राप्ति और महापरिनिर्वाण-तीनों घटनाएँ एक ही आध्यात्मिक धारा में समाहित हो जाती हैं, जो मानव इतिहास को एक अद्वितीय दार्शनिक गहराई प्रदान करती हैं। ऋग्वेद की सार्वभौमिक दृष्टि उद्घोष करती है- “एकं सद्विप्रा…

    Continue reading
    रायगढ़: 11 साल की मिष्ठी ने मचाया धमाल — पहले ही प्रयास में भारत सरकार की राष्ट्रीय छात्रवृत्ति फतह!

    रायगढ़ घराने की चौथी पीढ़ी की चमक, 9 साल तक मिलेगी खास कथक तालीम रायगढ़ | कहते हैं हुनर उम्र का मोहताज नहीं होता… और इस कहावत को सच कर दिखाया है 11 साल की नन्ही कथक नृत्यांगना मिष्ठी वैष्णव ने। बेहद कठिन चयन प्रक्रिया को पहले ही प्रयास में पार करते हुए मिष्ठी ने भारत सरकार की राष्ट्रीय छात्रवृत्ति हासिल कर ली है — और वो भी ऐसी छात्रवृत्ति, जो देश के चुनिंदा प्रतिभाओं को ही नसीब होती है। यह चयन संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *