बिलासपुर: लापरवाह कलेक्टर अवनीश शरण ने पत्रकारों को निमंत्रण कार्ड नहीं देकर किया अपमान
पद्मश्री को सम्मान के साथ निमंत्रण नहीं दिए जाने पर उठे सवाल
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में हर वर्ष की तरह इस बार भी राज्योत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें बिलासपुर के कई गणमान्य अतिथियों को आमंत्रित किया गया। परंतु इस बार की चर्चा का मुख्य कारण कुछ और ही है। राज्योत्सव में एक प्रतिष्ठित हस्ती, जिन्हें पद्मश्री सम्मान प्राप्त है, को निमंत्रण कलेक्टर अवनीश शरण ने मिलकर नहीं दिया, इस खबर से विवाद खड़ा हो गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, कलेक्टर अवनीश शरण ने इस साल कई प्रमुख हस्तियों को आमंत्रित किया, लेकिन पद्मश्री से सम्मानित पं. राम लाल बरेठ (रायगढ़ घराना) को निमंत्रण उन्होंने खुद जाकर नहीं दिया मतलब प्रोटोकॉल के तहत नहीं दिया। स्थानीय लोग और इस सम्मानित व्यक्ति के प्रशंसक इस घटना पर रोष जता रहे हैं। उनके अनुसार, यह राज्योत्सव जैसे महत्वपूर्ण आयोजन में किसी पद्मश्री विजेता का सम्मान करने का सही अवसर था, जो राज्य और देश की प्रतिष्ठा को बढ़ाता।
पद्मश्री विजेता रामलाल बरेठ को राज्योत्सव में इस तरह से निमंत्रण देने से, व्यक्त की निराशा
छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित पद्मश्री पुरस्कार विजेता रामलाल बरेठ, जो अपनी कला और सेवा के क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए जाने जाते हैं, को राज्योत्सव में अपमान करके निमंत्रण देने पर गहरा दुख हुआ है। हर साल राज्योत्सव में प्रमुख व्यक्तित्वों को आमंत्रित किया जाता है, परंतु कलेक्टर अवनीश शरण द्वारा उन्हें सम्मान के साथ न बुलाए जाने पर उन्होंने अपनी निराशा व्यक्त की है।
रामलाल बरेठ ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मैंने हमेशा अपने राज्य और समाज की सेवा में योगदान देने का प्रयास किया है। राज्योत्सव जैसे बड़े कार्यक्रम में सम्मान के साथ न बुलाए जाने से दुख हुआ है, क्योंकि यह मेरे जैसे लोगों के लिए राज्य के साथ अपने संबंध को महसूस करने का अवसर होता है।”
आम जनता की प्रतिक्रिया
राज्योत्सव के आयोजन में पद्मश्री जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार विजेताओं को सम्मान के साथ आमंत्रित न करने से स्थानीय जनता में निराशा है. लोगों ने सवाल उठाए हैं कि क्या प्रशासन इस तरह के महत्वपूर्ण अवसर पर अपने राज्य के प्रमुख चेहरों को उचित सम्मान देने में सक्षम नहीं है।
पद्मश्री विजेता की इस प्रतिक्रिया के बाद स्थानीय समुदायों में भी इस विषय पर रोष देखा गया है। लोग इस बात से नाखुश हैं कि एक ऐसे व्यक्ति को नजरअंदाज किया गया जिन्होंने छत्तीसगढ़ का नाम देशभर में रोशन किया है। नागरिकों का मानना है कि ऐसे महत्वपूर्ण आयोजनों में राज्य के गौरव को बुलाना और सम्मान देना जरूरी है।
सम्मान के प्रति असंवेदनशीलता?
यह घटना राज्य के कार्यक्रमों और आयोजनों में प्रोटोकॉल और समर्पित व्यक्तित्वों के प्रति संवेदनशीलता की कमी की ओर इशारा करती है। एक सम्मानित पद्मश्री विजेता को राज्योत्सव में बुलाने से राज्य के युवाओं को प्रेरणा मिलती और राज्य की छवि को भी मजबूती मिलती।
कलेक्टर शरण ने पद्मश्री विजेता, पत्रकार और मंत्रियों को नहीं दिया निमंत्रण
प्रोटोकाल के अनुसार, इस तरह के आयोजनों में कलेक्टर खुद विशेष अतिथियों के पास जाकर निमंत्रण देते हैं और कार्यक्रम में आने के लिए निवेदन करते हैं, पर यहाँ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ.
भविष्य की उम्मीद
पद्मश्री विजेता ने अंत में यह उम्मीद भी जताई कि आगे के आयोजनों में प्रशासन ऐसे चूकों को सुधारेगा और राज्य के सम्मानित लोगों को उचित स्थान और सम्मान दिया जाएगा। उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूँ कि राज्य के लोग एकजुट होकर छत्तीसगढ़ की उन्नति में योगदान दें।”
इस घटना ने राज्योत्सव जैसे बड़े आयोजन में प्रोटोकॉल और सम्मान के महत्व पर एक बहस को जन्म दिया है।
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