बिलासपुर। हिंदी को राष्ट्रभाषा के गौरवपूर्ण स्थान पर प्रतिष्ठित करने के संकल्प के साथ विश्व हिंदी परिषद ने एक बड़े राष्ट्रीय अभियान का आह्वान किया है। परिषद की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संगीता बनाफर ने जांजगीर-चांपा जिले के नवनियुक्त पदाधिकारियों एवं क्षेत्र के साहित्यकारों को शुभकामनाएँ देते हुए हिंदी के वैश्विक विस्तार की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि जांजगीर की साहित्यिक विरासत सदैव समृद्ध और प्रेरणादायी रही है। यहां के साहित्यकारों की शब्द-साधना केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने विश्वास जताया कि नई टीम हिंदी भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस दौरान डॉ. बनाफर ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि विश्व हिंदी परिषद के तत्वावधान में आगामी 30 एवं 31 अक्टूबर को Delhi स्थित “अटल स्मृति” में भव्य अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन का उद्देश्य हिंदी को वैश्विक मंच पर और अधिक सशक्त पहचान दिलाना है।
उन्होंने बताया कि सम्मेलन के लिए देश-विदेश के विद्वानों एवं शोधार्थियों से शोध पत्र आमंत्रित किए गए हैं। यह आयोजन हिंदी भाषा, साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता के मुद्दों पर गंभीर मंथन का मंच बनेगा।
डॉ. बनाफर ने भावुक अपील करते हुए कहा कि हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय आत्मा की पहचान है। सामूहिक प्रयासों से ही हिंदी को उसका वास्तविक संवैधानिक सम्मान मिल सकेगा। उन्होंने युवाओं, शिक्षाविदों और प्रशासनिक वर्ग से हिंदी को प्राथमिकता देने और इस वैश्विक आयोजन में अधिक से अधिक सहभागिता सुनिश्चित करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की साहित्यिक और सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का यह सुनहरा अवसर है, जिसे सभी को मिलकर सफल बनाना चाहिए।
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