“जिस घर में श्रद्धा, सेवा और संस्कार हों, वहां स्वयं राम का वास होता है” — श्रीरामभद्राचार्य
चरण-पादुका पूजन, भजन-कीर्तन और संत दर्शन से भक्तिमय हुआ एवमस्तु परिसर
बिलासपुर। न्यायधानी बुधवार को उस समय पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंग गई, जब तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी श्रीरामभद्राचार्य का आगमन रामा वर्ल्ड स्थित समाजसेवी प्रवीण झा के निवास “एवमस्तु” में हुआ। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। वैदिक मंत्रोच्चार, पुष्पवर्षा, श्रीराम स्तुति और भजन-कीर्तन के बीच पूरा परिसर भक्तिमय ऊर्जा से सराबोर नजर आया।
समाजसेवी प्रवीण झा ने सपत्नीक चरण-पादुका पूजन कर जगद्गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया। आयोजन में मौजूद श्रद्धालुओं ने बारी-बारी से पूजन-अर्चना कर आध्यात्मिक अनुभूति का अनुभव किया। भजनों की मधुर प्रस्तुतियों ने वातावरण को और अधिक दिव्य बना दिया।
जगद्गुरु श्रीरामभद्राचार्य ने अपने आशीर्वचन में कहा कि “जिस घर में सेवा, संस्कार और श्रद्धा का दीप प्रज्वलित होता है, वहां ईश्वर स्वयं निवास करते हैं। परिवार और समाज के प्रति समर्पण ही सच्ची साधना है।” उन्होंने प्रवीण झा परिवार की धार्मिक निष्ठा और सामाजिक सेवा की सराहना की।
इस दौरान स्वामी जी ने परिवारजनों एवं श्रद्धालुओं से आत्मीय चर्चा भी की। प्रवीण झा के दोनों पुत्रों ने चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। आयोजन के अंत में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया।
कौन हैं जगद्गुरु श्रीरामभद्राचार्य
स्वामी श्रीरामभद्राचार्य देश के प्रख्यात संत, रामकथा व्यास और आध्यात्मिक चिंतक हैं। वे भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और मानव सेवा को जीवन का मूल आधार मानते हैं। उनके प्रवचन देशभर में लाखों लोगों को धर्म, संस्कार और सकारात्मक जीवन की प्रेरणा देते हैं। सरल व्यक्तित्व और प्रभावशाली वाणी के कारण वे हर वर्ग में अत्यंत सम्मानित हैं।
“मेरे जीवन का अविस्मरणीय क्षण” — प्रवीण झा
समाजसेवी प्रवीण झा ने कहा कि जगद्गुरु श्रीरामभद्राचार्य का उनके निवास पर आगमन उनके परिवार के लिए किसी आध्यात्मिक उपलब्धि से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि चरण-पादुका पूजन के दौरान मिली आत्मिक शांति और ऊर्जा को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।
“मन को मिली अद्भुत शांति” — रौशन सिंह
सामाजिक कार्यकर्ता एवं भाजयुमो नेता रौशन सिंह ने कहा कि स्वामी जी के दर्शन मात्र से मन को अद्भुत शांति मिली। उन्होंने कहा कि सेवा और विनम्रता को जीवन का सबसे बड़ा धर्म बताने वाला स्वामी जी का संदेश बेहद प्रेरणादायक है।
“संतों का सानिध्य दुर्लभ” — रामप्रताप सिंह
रामप्रताप सिंह ने कहा कि संतों का सानिध्य जीवन के सबसे दुर्लभ अनुभवों में शामिल होता है। स्वामी जी की वाणी में ऐसी आत्मिक शक्ति है, जो सीधे हृदय को स्पर्श करती है।
महिलाओं और बच्चों में दिखा विशेष उत्साह
आयोजन में महिलाओं और बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचीं महिलाओं ने श्रद्धा के साथ पूजन-अर्चना की, वहीं बच्चों ने भी संत के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। पूरे आयोजन में अनुशासन, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का अद्भुत संगम दिखाई दिया।
दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त करने वालों में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे—
एसईसीएल के सीवीओ हिमांशु जैन, रामप्रताप सिंह, रौशन सिंह, ललित पुजारा, विकास केजरीवाल, विनोद मित्तल, गणेश गिरी, रोहित अग्रवाल, विक्की अग्रवाल, ए.के. कंठ, अशोक झा, राजा अवस्थी, हरिशंकर कुशवाहा, चंद्र किशोर प्रसाद, अजीत पंडित, शैलेंद्र सिंह, राजीव गिरी, सोनवान सिंह यादव, सन्नी गिरी, मुकेश झा, प्रवीण भट्टाचार्य, शशि मिश्रा, मिथिलेश ठाकुर, ए.के. पांडे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।















