बिलासपुर (उस्लापुर)। महाराणा प्रताप महाविद्यालय, उस्लापुर में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती उत्साह, श्रद्धा और देशभक्ति के माहौल में धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अनिता सिंह द्वारा महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर की गई।
इस अवसर पर आयोजित समारोह में प्राचार्य डॉ. अनिता सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप केवल इतिहास के एक महान योद्धा नहीं, बल्कि राष्ट्र स्वाभिमान, त्याग और अदम्य साहस के जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से महाराणा प्रताप के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने और उनके पदचिह्नों पर चलने का आह्वान किया।
अपने प्रेरक उद्बोधन में उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप ने स्वतंत्रता, सम्मान और राष्ट्रहित के लिए जो संघर्ष किया, वह आज भी करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कविता की पंक्तियों—
“राणा तेरी वीरता को कोटि-कोटि प्रणाम है”
—के माध्यम से महाराणा प्रताप के शौर्य को नमन किया।
डॉ. सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप का शौर्य, त्याग और राष्ट्रीय चेतना ही वह शक्ति थी जिसने मेवाड़ और अरावली को भारतीय स्वाभिमान का अमर प्रतीक बना दिया। उनका संघर्ष केवल मेवाड़ की रक्षा का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की अस्मिता और स्वतंत्रता की रक्षा का संघर्ष था।
जयंती समारोह के अंतर्गत भाषण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें महाविद्यालय के नि:शुल्क कम्प्यूटर प्रशिक्षण केंद्र के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने महाराणा प्रताप के जीवन, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति पर प्रभावशाली वक्तव्य प्रस्तुत किए। प्रतियोगिता के विजेता विद्यार्थियों को सम्मानित कर पुरस्कृत किया गया।
कार्यक्रम का संचालन निधि जायसवाल (सहायक प्राध्यापक, कम्प्यूटर विभाग) ने किया, जबकि दुर्गेश कुमार ने आभार प्रदर्शन किया।
महाराणा प्रताप जयंती के इस आयोजन ने विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम, आत्मसम्मान और संघर्षशीलता की भावना को नई ऊर्जा प्रदान की।















