पुलिस महकमे के भीतर बैठा अपराध: टीआई कलीम खान प्रकरण और सवालों के घेरे में न्याय व्यवस्था

विभागीय जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद कलीम खान के उपर कोई आपराधिक मामला दर्ज न किया जाना न्याय की हत्या के समान है 

केवल डिमोशन… क्या यह सजा बलात्कार जैसे गंभीर अपराध के लिए पर्याप्त है?

मुख्यमंत्री जी! इस मामले को संज्ञान में लें और दोषी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कर जनता को भरोसा दिलायें कि कोई भी वर्दीधारी, कानून से ऊपर नहीं है

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में हाल ही में सामने आया टीआई कलीम खान का मामला न केवल शर्मनाक है, बल्कि यह व्यवस्था के भीतर बैठे उस सड़ांध की ओर इशारा करता है, जो आम जनता के भरोसे को लगातार चकनाचूर कर रही है। एक ओर जहां पुलिस आम नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदार संस्था मानी जाती है, वहीं दूसरी ओर यदि वही संस्था किसी महिला के शोषण की साझीदार बन जाए, तो सवाल केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि पूरे तंत्र पर खड़ा होता है।

टीआई कलीम खान पर आरोप है कि उन्होंने बिलासपुर में अपनी पदस्थापना के दौरान एक 82 लाख रुपए की धोखाधड़ी के मामले में आरोपी को न केवल गिरफ्तार नहीं किया, बल्कि केस कमजोर करने के एवज में रिश्वत की मांग की। इससे भी घृणित बात यह है कि उन्होंने आरोपी की पत्नी के साथ बलात्कार जैसा जघन्य अपराध किया। यह आरोप किसी गली-नुक्कड़ की चर्चा नहीं, बल्कि पुलिस विभाग के ही आंतरिक दस्तावेजों और शिकायतों के आधार पर सामने आया है।

इस पूरे प्रकरण में सबसे ज्यादा निराशाजनक पहलू यह है कि कार्रवाई केवल डिमोशन (टीआई से एसआई बनाए जाने) तक सीमित रही है। क्या यह सजा ऐसे अपराध के लिए पर्याप्त है? बलात्कार जैसे अपराध की कानूनी श्रेणी स्पष्ट है—यह गंभीर आपराधिक कृत्य है, जिसके लिए IPC की धारा 376 के अंतर्गत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार करना अनिवार्य है। यदि आम नागरिक पर ऐसा आरोप लगे तो क्या उसे केवल नौकरी में पदावनति की सजा देकर छोड़ दिया जाता?

यह मामला इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि आरोपी स्वयं पुलिस अधिकारी है और इसी वजह से शिकायतकर्ता महिला को समय पर न्याय नहीं मिल पाया। विभागीय जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद कोई आपराधिक मामला दर्ज न किया जाना न्याय की हत्या के समान है। ऐसे मामलों में यह जरूरी हो जाता है कि जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी (जैसे CID या SIT) से कराई जाए ताकि निष्पक्षता बनी रहे।

आज जब महिला सुरक्षा को लेकर सरकारें योजनाएं बना रही हैं, महिला हेल्पलाइन शुरू की जा रही हैं, तो ऐसे मामले उन सभी प्रयासों को झुठला देते हैं। जनता को भरोसा दिलाना होगा कि कोई भी वर्दीधारी, कानून से ऊपर नहीं है।

समाज को, मीडिया को, और जनप्रतिनिधियों को इस पर खुलकर सवाल उठाने होंगे—वरना आने वाले दिनों में वर्दी के पीछे छुपे अपराध और भी बेखौफ हो जाएंगे।

उक्त न्यूज़ मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर लिखी गई है.
  • पंकज खण्डेलवाल

    Pankaj Khandelwal is the Founder & Principal Editor of News Hub Insight (NHI). He is an independent journalist with expertise in governance, education, public policy, civic issues and investigative reporting. His reporting is based on accuracy, public interest and responsible journalism. Every article published under his editorial supervision follows News Hub Insight's Editorial Policy, Fact Check Policy and Correction Policy.

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