गलती अफसरों की, सजा बाबुओं को?” — मुंगेली में लिपिक निलंबन पर भड़का संघ, डॉ. सुनील यादव ने दी आंदोलन की चेतावनी

“अफसर बचें, बाबू फंसे!” — मुंगेली निलंबन कांड पर लिपिक संघ का बवाल

पदोन्नति विवाद में लिपिक पर गिरी गाज, संघ बोला— असली जिम्मेदारों पर कब होगी कार्रवाई?

मुंगेली डीईओ कार्यालय में निलंबन विवाद, लिपिक संघ ने खोला मोर्चा

“बलि का बकरा नहीं बनेंगे बाबू” — छत्तीसगढ़ में आंदोलन की चेतावनी

अधिकारियों की गलती का खामियाजा कर्मचारियों को? मनोज साहू प्रकरण ने उठाए बड़े सवाल

बिलासपुर/मुंगेली। छत्तीसगढ़ में अधिकारियों द्वारा स्वयं को बचाने के लिए लिपिकों को बलि का बकरा बनाए जाने का आरोप लगाते हुए छत्तीसगढ़ लिपिक वर्गीय कर्मचारी संघ ने मुंगेली के शिक्षा विभाग में हुई निलंबन कार्रवाई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ ने स्पष्ट कहा है कि यदि नियम विरुद्ध निलंबन वापस नहीं लिया गया तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।

संघ के प्रदेश महामंत्री डॉ. सुनील कुमार यादव ने कहा कि मुंगेली जिले में शिक्षकों की पदोन्नति से जुड़े मामले में जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश के बाद पूरे प्रकरण का ठीकरा एक लिपिक मनोज साहू पर फोड़ दिया गया, जबकि पदोन्नति जैसी प्रक्रिया किसी एक कर्मचारी के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती।

पदोन्नति विवाद में लिपिक बना निशाना?

जानकारी के अनुसार वर्ष 2005 बैच के कुछ शिक्षक वर्ष 2023 की पदोन्नति प्रक्रिया में वंचित रह गए थे। इसके बाद मामला न्यायालय पहुंचा। न्यायालय के आदेश के बाद जिला स्तर पर डीपीसी आयोजित हुई और जिला शिक्षा अधिकारी के हस्ताक्षर से पदोन्नति आदेश जारी किया गया।

संघ का आरोप है कि जब संयुक्त संचालक कार्यालय से पदोन्नति आदेश की वैधानिकता पर सवाल उठाने वाला पत्र आया, तब पूरी जिम्मेदारी तय करने के बजाय केवल लिपिक मनोज साहू को प्रथम दृष्टया दोषी मानकर निलंबित कर दिया गया।

“लिपिक आदेशों का पालन करता है, निर्णय नहीं लेता”

संघ का कहना है कि लिपिक केवल प्रकरण प्रस्तुत करता है, अंतिम निर्णय और आदेश जारी करने का अधिकार अधिकारियों के पास होता है। ऐसे में पूरी प्रक्रिया में शामिल अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय किए बिना केवल एक कर्मचारी पर कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं है।

पीड़ित लिपिक मनोज साहू ने भी संघ को बताया कि वह विधिक मामलों का विशेषज्ञ नहीं है और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार कार्य करता रहा है।

विधि विशेषज्ञों की कमी बनी वजह?

संघ ने सवाल उठाया कि राज्य स्तर पर विधि प्रकोष्ठ होने के बावजूद जिला स्तर पर ऐसी कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण न्यायालयीन आदेशों की सही व्याख्या नहीं हो पाती। यदि समय रहते उच्च कार्यालय से मार्गदर्शन लिया जाता तो विवाद की स्थिति ही पैदा नहीं होती।

वन विभाग का मामला भी उठाया

संघ ने दावा किया कि यह पहला मामला नहीं है। वन विभाग के चर्चित प्रकरणों में भी लिपिकों पर कार्रवाई हुई है। कई बार भ्रष्टाचार या प्रशासनिक त्रुटियों के मामलों में वास्तविक जिम्मेदारों तक कार्रवाई पहुंचने के बजाय निचले कर्मचारियों को निशाना बनाया जाता है।

संघ का बड़ा संदेश

प्रदेश महामंत्री डॉ. सुनील यादव ने लिपिकों से अपील की है कि वे बिना पर्याप्त प्रशिक्षण और लिखित निर्देशों के संवेदनशील मामलों में अनावश्यक जिम्मेदारी न लें तथा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को प्राथमिकता देते हुए पारदर्शी कार्य संस्कृति को बढ़ावा दें।

आंदोलन की चेतावनी

लिपिक संघ ने मुंगेली शिक्षा विभाग और वन विभाग में निलंबित कर्मचारियों के मामलों की समीक्षा कर कार्रवाई वापस लेने की मांग की है। संघ का कहना है कि यदि उच्च अधिकारियों ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो राज्यव्यापी चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।

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