बिलासपुर। शहर के साहित्यिक परिवेश में रविवार की शाम एक यादगार क्षण दर्ज हुआ, जब वरिष्ठ गीतकार एवं साहित्य मनीषी विजय कल्याणी तिवारी के नवें काव्य संग्रह “अब हम रहते डरे-डरे” का सांई आनंदम परिसर, उसलापुर में गरिमामय समारोह के बीच विमोचन किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, न्यायपालिका और पत्रकारिता जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष बना दिया।

समारोह के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति डॉ. चंद्र भूषण वाजपेयी ने पुस्तक का विमोचन करते हुए इसे “बिलासपुर के साहित्य जगत की धरोहर” बताया। उन्होंने कहा कि विजय तिवारी ने अपनी सहधर्मिणी का नाम अपने नाम के साथ जोड़कर सामाजिक सोच को नया आयाम दिया है। यह केवल सम्मान का प्रतीक नहीं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणादायी संदेश भी है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थावे विद्यापीठ के कुलपति डॉ. विनय कुमार पाठक ने काव्य संग्रह की रचनाओं के भाव, शिल्प और गीत परंपरा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि इस संग्रह की कई रचनाएँ कालजयी बनने की क्षमता रखती हैं। उन्होंने भारतीय सनातन परंपरा में गीतों के ऐतिहासिक महत्व का भी उल्लेख किया।
विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार केशव शुक्ला ने पुस्तक के शीर्षक “अब हम रहते डरे-डरे” को वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों से जोड़ते हुए कहा कि यह केवल एक शीर्षक नहीं, बल्कि आज के समय की मानसिक और सामाजिक स्थिति का सशक्त दस्तावेज है।
पुस्तक पर अमृत लाल पाठक, बुधराम यादव, रेखराम साहू, ओमप्रकाश भट्ट और मयंक मणि दुबे ने समीक्षात्मक वक्तव्य देते हुए कहा कि यदि किसी को गीत, छंद और गेयता की वास्तविक समझ विकसित करनी है, तो इस संग्रह का गंभीर अध्ययन करना चाहिए।
इस अवसर पर कवि विजय कल्याणी तिवारी ने अपनी साहित्यिक यात्रा के अनुभव साझा किए और संग्रह के प्रतिनिधि गीतों का प्रभावशाली काव्य-पाठ एवं गायन कर उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
समारोह में असरफी लाल सोनी, राजेश सेवतकर, शैलेन्द्र गुप्ता, शिव शरण श्रीवास्तव, मनीषा भट्ट, अंतिमा दुबे, पूर्णिमा तिवारी, विष्णु तिवारी, शिव मंगल शुक्ला, रामनिहोरा राजपूत, सुरेश पांडेय, लक्ष्मीकांत शुक्ला सहित शहर के अनेक साहित्यकार, बुद्धिजीवी एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।







