शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव और सचिव कमलप्रीत सिंह जवाब दें: 10 दिन से डीईओ नहीं, 3 दिन बाद भी आदेश क्यों नहीं?

 10 दिन से बिना डीईओ, 3 दिन से आदेश का इंतज़ार… आखिर बिलासपुर का शिक्षा विभाग चला कौन रहा है?

मंत्री-सचिव की सुस्ती या सिस्टम की नाकामी? 10 दिन से बिना डीईओ चल रहा बिलासपुर का शिक्षा विभाग

मंत्री-सचिव की उदासीनता से बेहाल शिक्षा विभाग! 10 दिन से डीईओ गायब, सेजेस की स्कूलों तक नहीं पहुंचीं अंग्रेजी की किताबें

बच्चों के भविष्य से खिलवाड़? मंत्री और सचिव के आश्वासन के बाद भी नहीं मिला बिलासपुर को डीईओ

बिलासपुर का शिक्षा विभाग इन दिनों एक ऐसे प्रशासनिक संकट से गुजर रहा है, जो केवल सरकारी व्यवस्था पर नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों के भविष्य पर भी सवाल खड़े कर रहा है। करीब 10 दिनों से जिले में प्रभावी जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) नहीं है। फैसले लेने वाला जिम्मेदार अधिकारी नहीं होने से जिला शिक्षा कार्यालय लगभग नेतृत्वविहीन स्थिति में पहुंच गया है।

News Hub Insight ने इस गंभीर स्थिति को प्रमुखता से उठाया था। खबर प्रकाशित होने के बाद शिक्षा विभाग के सचिव कमलप्रीत सिंह ने कहा था कि “प्रभार देने हेतु प्रस्ताव आ गया है, कल तक आदेश हो जाएगा।” यह बयान उम्मीद जगाने वाला था कि प्रशासनिक शून्यता जल्द समाप्त होगी।

लेकिन अब उस आश्वासन को भी तीन दिन बीत चुके हैं। न नए प्रभारी का आदेश जारी हुआ, न शिक्षा विभाग को स्थायी नेतृत्व मिला। यदि सचिव स्तर पर आश्वासन के बाद भी आदेश जारी नहीं हो पा रहा है, तो स्वाभाविक सवाल उठता है कि आखिर फाइल किस टेबल पर अटकी हुई है? यदि कोई प्रशासनिक या कानूनी बाधा है, तो सरकार को उसे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए।

इधर, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों की दो स्कूलों में अब तक अंग्रेजी विषय की किताबें नहीं पहुंची हैं। शिक्षा सत्र शुरू हुए समय बीत रहा है, लेकिन विद्यार्थी बिना किताबों के पढ़ाई करने को मजबूर हैं। यह केवल एक छोटी सी प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की तैयारी पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिले में लगभग 10 दिनों से डीईओ नहीं है, तब पूरे शिक्षा विभाग की जवाबदेही किसके पास है? शिक्षकों की समस्याएं कौन सुनेगा? स्कूलों के प्रशासनिक निर्णय कौन लेगा? लंबित फाइलों पर हस्ताक्षर कौन करेगा? और यदि कोई आपात स्थिति पैदा हो जाए, तो अंतिम जिम्मेदारी किसकी होगी?

शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से अब प्रदेश के विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों की ओर से सीधा प्रश्न है—क्या बिलासपुर जैसे बड़े जिले की शिक्षा व्यवस्था सरकार की प्राथमिकता में है? यदि हां, तो फिर एक प्रभारी अधिकारी की नियुक्ति में भी इतने दिन क्यों लग रहे हैं? और विद्यार्थियों तक समय पर किताबें पहुंचाने जैसी बुनियादी जिम्मेदारी भी क्यों पूरी नहीं हो पा रही?

शिक्षा केवल भवन, योजनाओं और घोषणाओं से नहीं चलती। शिक्षा व्यवस्था समय पर निर्णय, जवाबदेह प्रशासन और संवेदनशील नेतृत्व से चलती है। 10 दिन से डीईओ नहीं, 3 दिन से आदेश का इंतजार और स्कूलों में किताबों का अभाव—ये तीनों तथ्य मिलकर बताते हैं कि कहीं न कहीं सिस्टम की रफ्तार विद्यार्थियों के भविष्य से भी धीमी पड़ गई है।

अब सरकार के सामने केवल एक विकल्प है—आश्वासन नहीं, तत्काल कार्रवाई। क्योंकि शिक्षा विभाग की हर देरी का सीधा नुकसान उन बच्चों को होता है, जिनके भविष्य की जिम्मेदारी इसी व्यवस्था पर है।

  • पंकज खण्डेलवाल

    Pankaj Khandelwal is the Founder & Principal Editor of News Hub Insight (NHI). He is an independent journalist with expertise in governance, education, public policy, civic issues and investigative reporting. His reporting is based on accuracy, public interest and responsible journalism. Every article published under his editorial supervision follows News Hub Insight's Editorial Policy, Fact Check Policy and Correction Policy.

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