बिलासपुर। साहित्य जब भाषाओं की सीमाएं तोड़कर समाज को जोड़ने का माध्यम बन जाए, तब उसका महत्व और बढ़ जाता है। इसी भावना को साकार करते हुए उत्कल विलास साहित्य संसद (मध्य क्षेत्र) द्वारा ‘उत्कल बिलास’ साहित्यिक पत्रिका के 10वें अंक का भव्य विमोचन श्री जगन्नाथ मंदिर प्रांगण, रेलवे क्षेत्र में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में साहित्य, न्याय, शिक्षा और समाजसेवा से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक (पूर्व अध्यक्ष, राजभाषा आयोग, छत्तीसगढ़), अध्यक्ष करुणाकर बेहरा (वरिष्ठ समाजसेवी, ओड़िआ समाज), समारोह भूषण न्यायमूर्ति डॉ. चंद्रभूषण वाजपेयी तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. बृजेश सिंह एवं गोपाल कृष्ण राय (ओडिशा) ने संयुक्त रूप से पत्रिका के 10वें अंक का विमोचन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के तैलचित्र पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुई। अतिथियों के स्वागत के बाद पत्रिका का लोकार्पण किया गया।
मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक ने कहा कि “उत्कल बिलास केवल एक साहित्यिक पत्रिका नहीं, बल्कि विभिन्न भाषाओं के साहित्यकारों और संस्कृतियों को जोड़ने वाला सशक्त सेतु है।” उन्होंने इस सतत साहित्यिक साधना के लिए प्रधान संपादक श्री बामन चंद्र दीक्षित को बधाई दी।
समारोह भूषण न्यायमूर्ति डॉ. चंद्रभूषण वाजपेयी ने इसे बहुभाषी साहित्यिक समन्वय का अनूठा उदाहरण बताते हुए कहा कि एक ही पत्रिका में हिंदी, ओड़िआ, छत्तीसगढ़ी और अंग्रेजी की रचनाओं का समावेश इसे विशिष्ट बनाता है।
अध्यक्ष करुणाकर बेहरा ने कहा कि ऐसी पत्रिकाएं समाज और साहित्य को जोड़ने का कार्य करती हैं तथा इन्हें निरंतर प्रकाशित होते रहना चाहिए। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. बृजेश सिंह ने पत्रिका की बहुभाषी अवधारणा की सराहना करते हुए इसे समय की आवश्यकता बताया, जबकि गोपाल कृष्ण राय ने भविष्य में भी सहयोग और सामूहिक प्रयास से इसे और समृद्ध बनाने की बात कही।
10 वर्षों से जारी है साहित्यिक यात्रा
प्रधान संपादक बामन चंद्र दीक्षित के संपादन में प्रकाशित ‘उत्कल बिलास’ पिछले 10 वर्षों से लगातार साहित्य सेवा कर रही है। पत्रिका में हिंदी, ओड़िआ, छत्तीसगढ़ी एवं अंग्रेजी भाषाओं की रचनाओं को समान महत्व देकर बहुभाषी साहित्यिक संस्कृति को सशक्त मंच प्रदान किया जाता है।
साहित्य के साथ संस्कृति का भी हुआ संगम
कार्यक्रम में सोनाक्षी बेहरा, शौर्या भारत एवं ओजस्विनी राठौर ने मनमोहक सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
इस अवसर पर जगन्नाथ सेवा समाज, ओड़िआ समाज एवं उत्कल बिलास परिवार की ओर से साहित्य और समाज में उल्लेखनीय योगदान देने वाली 13 विभूतियों को स्मरणिका तथा 20 प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कवियों और साहित्यकारों ने बांधा समां
साहित्यिक गोष्ठी में बामन चंद्र दीक्षित, सुब्रत रथ, दुशासन नायक, गोपाल कृष्ण राय, पंडित गोविंद चंद्र, डॉ. राघवेंद्र दुबे, राजेश कुमार सोनार, शत्रुघ्न जैसवानी, शीतल प्रसाद पाटनवार, बालमुकुंद श्रीवास, दिनेश तिवारी, अशोक शर्मा, दीपक दुबे, मनोहर दास मानिकपुरी, डॉ. नंदकुमार सिंह, डॉ. आभा गुप्ता, डॉ. अनिता सिंह, पूर्णिमा तिवारी, अंतिमा पांडे, वीणा शुक्ला, रामकुमार श्रीवास, सुनील दत्त मिश्रा और मणिशंकर दुबे सहित अनेक साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन बामन चंद्र दीक्षित ने किया तथा बालमुकुंद श्रीवास ने आभार व्यक्त किया। शांति पाठ के साथ आयोजन का विधिवत समापन हुआ।







