दलगत राजनीति से ऊपर उठकर महिलाओं का सम्मान – बिलासपुर में दिखी सशक्तिकरण की मिसाल

बिलासपुर (छत्तीसगढ़), 12 अप्रैल 2026। समाज में एकता और महिला सशक्तिकरण का अनूठा उदाहरण पेश करते हुए बिलासपुर में फूले-अम्बेडकर महिला सशक्तिकरण एवं प्रतिभा सम्मान समारोह का भव्य आयोजन हुआ। कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत रही—दलगत राजनीति से ऊपर उठकर महिला जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी और उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं का सम्मान।

यह आयोजन डॉ. भीमराव अम्बेडकर और महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया, जिसमें उनके विचारों को समाज तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया।

सशक्तिकरण का संदेश, शिक्षा का संकल्प

कार्यक्रम का उद्देश्य साफ था—महिलाओं और बच्चों तक शिक्षा, समानता और आत्मसम्मान का संदेश पहुंचाना।
सावित्रीबाई फुले के संघर्षों को याद करते हुए समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया गया।

बच्चों की प्रतिभा को मिला मंच

समारोह में बच्चों के लिए कई प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं

चित्रकला प्रतियोगिता:19 बच्चों ने महापुरुषों के जीवंत चित्र उकेरे
निबंध प्रतियोगिता: 15 प्रतिभागी, जिनमें 5 ने अंग्रेजी में लेखन किया
वेशभूषा प्रतियोगिता: बच्चों ने ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का जीवंत प्रदर्शन किया

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को सम्मानित किया गया, वहीं 95% से अधिक अंक लाने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को भी विशेष रूप से सराहा गया।

महिला जनप्रतिनिधियों का हुआ सम्मान

समारोह में कई महिला जनप्रतिनिधियों को “माता सावित्री फूले महिला सशक्तिकरण सम्मान” से नवाजा गया।
इनमें प्रमुख रूप से—

– पामगढ़ विधायक श्रीमती शेष राज हरवंश
– जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सत्यलता मिरी
– जिला पंचायत सदस्य श्रीमती अरुणा सूर्या
– श्रीमती सतकली बावरे
– सुश्री प्रीति बान्धेकर सहित अन्य शामिल रहीं

वक्ताओं ने भरी ऊर्जा

– विधायक शेष राज हरवंश ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं में आत्मविश्वास की चिंगारी जगाई।
– सत्यलता मिरी ने महिलाओं से आगे आने का आह्वान किया।
– प्रीति बान्धेकर ने अंधविश्वास से ऊपर उठने की बात कही।
-डॉ. लक्ष्मण कुमार भारती ने कहा—“सावित्रीबाई के संघर्षों ने ही आज महिलाओं को शिक्षित और सशक्त बनाया है।”

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

कार्यक्रम में सरजू रत्नाकर द्वारा प्रस्तुत गीत—
“ज्ञान सूर्य तू इस जगत के…” और
“स्वतंत्रता को बल देता भारत का संविधान…”
ने पूरे माहौल को भावनात्मक और प्रेरणादायक बना दिया।

200 दानदाताओं का सम्मान – कार्यक्रम की खास पहचान

कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण रहा—
निःशुल्क कोचिंग के लिए सहयोग देने वाले करीब 200 दानदाताओं का सम्मान।
इनके प्रयासों से आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिल रहा है।

संचालन और आयोजन

कार्यक्रम का संचालन जिजीविषा पाटले ने किया, जबकि आयोजनबअनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स) एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर ज्ञान केंद्र, मगरपारा रोड, बिलासपुर द्वारा किया गया।

बिलासपुर का यह आयोजन केवल एक सम्मान समारोह नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण का सशक्त संदेश बनकर उभरा—जहां राजनीति नहीं, बल्कि प्रतिभा और समर्पण का सम्मान हुआ।

 

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