डॉ. रमेश चंद्र श्रीवास्तव बोले—श्रीकांत वर्मा से बिलासपुर की पहचान को मिला विस्तार
शिवसेना-एनडीए गठबंधन के मुख्य राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. अभिषेक वर्मा का कायस्थ समाज ने किया आत्मीय अभिनंदन

बिलासपुर। शिवसेना-एनडीए गठबंधन के मुख्य राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. अभिषेक वर्मा के बिलासपुर आगमन पर विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा स्वागत किया गया। इसी क्रम में चित्रगुप्त चौक में कायस्थ समाज द्वारा पूर्व अध्यक्ष गजेंद्र श्रीवास्तव के नेतृत्व में डॉ. अभिषेक वर्मा का आत्मीय एवं गरिमापूर्ण अभिनंदन किया गया।
चित्रगुप्त चौक पहुंचने पर डॉ. अभिषेक वर्मा ने भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने उपस्थित समाजजनों से संवाद किया।
“देश के नवनिर्माण में कायस्थ समाज की महत्वपूर्ण भूमिका”
डॉ. अभिषेक वर्मा ने कहा कि कायस्थ समाज ने देश के विकास, प्रशासन, साहित्य, शिक्षा और सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने समाजजनों से देश के नवनिर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
अपने पिता और बिलासपुर की साहित्यिक विरासत को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनके पिता स्वर्गीय श्रीकांत वर्मा ने साहित्य, समाज और राष्ट्र के सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने समाज से राष्ट्रहित में निरंतर सक्रिय रहने की अपील की।
श्रीकांत वर्मा का बिलासपुर से गहरा संबंध रहा है। वे हिंदी के प्रतिष्ठित कवि, कथाकार, समीक्षक और पत्रकार रहे तथा सार्वजनिक जीवन में भी सक्रिय रहे। (Hindwi)
गजेंद्र श्रीवास्तव ने याद किया श्रीकांत वर्मा का विराट व्यक्तित्व
कायस्थ समाज के पूर्व अध्यक्ष गजेंद्र श्रीवास्तव ने डॉ. अभिषेक वर्मा का स्वागत करते हुए कहा कि स्वर्गीय श्रीकांत वर्मा का व्यक्तित्व अत्यंत विराट था। बिलासपुर उनकी जन्मभूमि होने के कारण इस शहर से उनका विशेष भावनात्मक संबंध रहा।
उन्होंने श्रीकांत वर्मा के साहित्यिक और सार्वजनिक जीवन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि उनकी रचनात्मक यात्रा में बिलासपुर की मिट्टी और सामाजिक परिवेश की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
डॉ. रमेश चंद्र श्रीवास्तव बोले—श्रीकांत वर्मा से बिलासपुर की पहचान को मिला विस्तार
वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व आईएएस डॉ. रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने डॉ. अभिषेक वर्मा का स्वागत करते हुए कहा कि श्रीकांत वर्मा देश के प्रतिष्ठित कवि और सार्वजनिक जीवन की महत्वपूर्ण हस्ती थे।
उन्होंने कहा कि श्रीकांत वर्मा के बिलासपुर में रहने के दौर में शहर की साहित्यिक और राजनीतिक गतिविधियों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। श्रीकांत वर्मा की साहित्यिक पहचान आज भी बिलासपुर की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
समाजजनों की रही बड़ी उपस्थिति
कार्यक्रम में मनीष श्रीवास्तव ने उपस्थित अतिथियों एवं समाजजनों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर शरद श्रीवास्तव, भूपेंद्र श्रीवास्तव, रतीश श्रीवास्तव, गोवर्धन श्रीवास्तव, आलोक वर्मा, आशु वर्मा, रजनीश श्रीवास्तव, रक्कू वर्मा, अभिलाष श्रीवास्तव, अमन श्रीवास्तव, निशांत श्रीवास्तव, प्रदीप श्रीवास्तव, जयंत श्रीवास्तव, श्रीमती किरण श्रीवास्तव, मास्टर तनिष्क वर्मा, श्रीमती पूजा श्रीवास्तव, श्रीमती लता श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में स्वागत, सामाजिक संवाद और श्रीकांत वर्मा की साहित्यिक विरासत का स्मरण—तीनों पहलू प्रमुखता से सामने आए।







