बिलासपुर: शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज का दौरा, विवाद पर रखी अपनी राय

बिलासपुर। तिरुपति बालाजी मंदिर में लड्डुओं के प्रसाद को लेकर चल रहे विवाद के बीच श्री गोवर्धन मठ पुरी के पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि यदि मठ मंदिरों को आमदनी का जरिया बनाया गया तो ऐसा ही होगा। उन्होंने यह भी कहा कि मठ मंदिरों का दोहन नहीं होना चाहिए और उनका सरकारीकरण नहीं होना चाहिए।

शंकराचार्य स्वामी जी ने बिरकोना रोड स्थित अशोक वाटिका में दर्शन दीक्षा एवं संगोष्ठी कार्यक्रम के दौरान भक्तों के सवालों के जवाब दिए। गौ हत्या के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने गौ माता की रक्षा का आह्वान किया था। आज, वह प्रधानमंत्री बनकर गौ रक्षकों को गुंडे कहे जाने की आलोचना की। उन्होंने आधुनिक युग में बैल और यंत्रों के उपयोग की चर्चा की, और बताया कि कैसे कृषि में बैलगाड़ी का उपयोग कम होता जा रहा है।

स्वामी निश्चलानंद जी का आज शहर में आगमन हुआ, जहाँ उन्हें कई भक्तों और कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया। पूर्व विधायक शैलेश पांडे, आदित्य वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष टीकाराम साहू समेत अनेक सदस्यों ने उनका स्वागत किया और आरती उतारी।

संस्कृत के अध्यापन पर उठाई आवाज

एक भक्त के सवाल पर स्वामी जी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में संस्कृत के पाठ्यक्रम की आवश्यकता है। उन्होंने विष्णुदेव सरकार से संस्कृत विद्यालयों की स्थापना के लिए चर्चा करने का वादा किया, ताकि राज्य के युवा और बच्चे यहाँ संस्कृत की पढ़ाई कर सकें।

पत्रकारों से मुलाकात का कार्यक्रम

स्वामी निश्चलानंद जी महाराज कल बिरकोना रोड अशोक वाटिका में दोपहर 12:00 बजे पत्रकारों से बातचीत करेंगे। उन्होंने सभी भक्तों से अपील की है कि वे प्रातः 11:00 बजे अवश्य उपस्थित हों। कार्यक्रम के अंत में 2 अक्टूबर को उनकी आरती होगी, इसके बाद वे आगरा के लिए प्रस्थान करेंगे।

आध्यात्मिक सलाहें

स्वामी जी ने हनुमान चालीसा का पाठ करने की सलाह दी और कहा कि इसे 40 मिनट तक करना चाहिए। राम नाम के महत्व पर उन्होंने कहा कि यह अग्नि, सूर्य और चंद्रमा के बीच का तत्व है। उन्होंने युवाओं को शिक्षा के साथ-साथ अध्यात्म और धर्म से जुड़ने की सलाह दी और कुसंगति से बचने का आह्वान किया।

आज के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भक्तगण उपस्थित थे, जिन्होंने स्वामी निश्चलानंद जी से आशीर्वाद प्राप्त किया।

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