बिलासपुर: क्या रेत माफियाओं पर प्रशासनिक सख्ती टिकाऊ होगी?

बिलासपुर में नए कलेक्टर संजय अग्रवाल के पदभार ग्रहण करने के बाद पहले बोदरी तहसील के पिरैया और नगाड़ाडीह गांवों में अवैध रेत भंडारण पर बड़ी कार्रवाई की गई और उसके बाद आज तखतपुर तहसील के ग्राम मोढ़े में की गई, यह कार्रवाई एक स्वागतयोग्य कदम है। अवैध खनन लंबे समय से न केवल पर्यावरण के लिए खतरा बना हुआ है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की साख को भी चुनौती दे रहा है। इन कार्रवाइयों में  555 ट्रैक्टर रेत जब्त होना अपने आप में बताता है कि यह कोई छोटी गतिविधि नहीं, बल्कि एक संगठित और खुलेआम चलने वाला अपराध है।

प्रश्न यह नहीं है कि कार्रवाई हुई — बल्कि यह है कि क्या यह कार्रवाई एक स्थायी पहल का हिस्सा है या एक बार फिर केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी। अतीत में बार-बार देखा गया है कि किसी नए अधिकारी के आने पर दो-चार दिन तक कार्रवाई होती है, मीडिया में सुर्खियां बनती हैं और फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। माफिया एक बार फिर सक्रिय हो जाते हैं, और वही चक्र फिर शुरू हो जाता है।

यह स्पष्ट है कि जब तक अवैध रेत खनन को राजनैतिक या प्रशासनिक संरक्षण मिलता रहेगा, तब तक इस पर स्थायी रोक लगाना असंभव है। स्थानीय प्रशासन को अब इस चुनौती को एक मिशन की तरह लेना होगा — केवल रेत जब्त कर देने से कुछ नहीं होगा, दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई, लाइसेंस निरस्त करना, और आपराधिक प्रकरण दर्ज करना आवश्यक है।

इसके साथ ही, समाज की भागीदारी भी जरूरी है। ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को यदि सच में पर्यावरण और विकास की चिंता है, तो उन्हें भी इन गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठानी होगी। यह केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

कलेक्टर अग्रवाल की पहल सराहनीय है — लेकिन सच्ची कसौटी यही होगी कि यह अभियान कितने समय तक, कितनी गहराई तक चलता है। क्या यह एक बदलाव की शुरुआत है या फिर एक और प्रशासनिक औपचारिकता?

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  • पंकज खण्डेलवाल

    Pankaj Khandelwal is the Founder & Principal Editor of News Hub Insight (NHI). He is an independent journalist with expertise in governance, education, public policy, civic issues and investigative reporting. His reporting is based on accuracy, public interest and responsible journalism. Every article published under his editorial supervision follows News Hub Insight's Editorial Policy, Fact Check Policy and Correction Policy.

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