बिलासपुर। शहर के सरकंडा थाना से एक बेहद चौंकाने वाली और चिंताजनक स्थिति सामने आई है। कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले थाना प्रभारी का सरकारी मोबाइल नंबर 9479193022 बंद बता रहा है, जबकि थाना का लैंडलाइन नंबर 07752-246441 मिलाने पर “उपभोक्ता कॉल स्वीकार नहीं कर रहे हैं” जैसी सूचना सुनाई दे रही है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि अगर किसी नागरिक के साथ अचानक कोई आपात स्थिति हो जाए तो वह आखिर किसे फोन करे और मदद किससे मांगे?
पुलिस विभाग अक्सर जनता से अपील करता है कि किसी भी घटना, विवाद या अपराध की स्थिति में तुरंत थाने से संपर्क करें। लेकिन जब थाना प्रभारी का आधिकारिक नंबर ही बंद मिले और थाने का लैंडलाइन भी जवाब न दे, तो यह स्थिति न सिर्फ हैरान करने वाली है बल्कि पुलिस व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय या किसी अचानक घटना के दौरान सबसे पहले पुलिस को ही फोन किया जाता है। लेकिन अगर थाने के ही संपर्क नंबर बंद या अनुपलब्ध मिलें, तो आम नागरिक खुद को असहाय महसूस करता है।
क्या सिर्फ कागजों में सक्रिय हैं सरकारी नंबर?
यह मामला सिर्फ एक फोन नंबर का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का है जो दावा करती है कि पुलिस 24 घंटे जनता की सेवा में तत्पर है। अगर थाने का आधिकारिक संपर्क ही काम न करे, तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या सरकारी नंबर सिर्फ कागजों में ही सक्रिय हैं?
जनता के लिए संपर्क का क्या विकल्प?
जब थाना प्रभारी का सरकारी मोबाइल बंद हो और लैंडलाइन भी कॉल स्वीकार न करे, तो आम नागरिक के सामने सबसे बड़ा संकट यही होता है कि वह अपनी शिकायत या आपात स्थिति में किससे संपर्क करे।
जवाबदेही तय होगी या नहीं?
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर थाना प्रभारी का सरकारी मोबाइल नंबर बंद क्यों है, और इस मामले में पुलिस विभाग क्या कदम उठाता है।
साथ ही यह भी बड़ा सवाल है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों से इस लापरवाही पर स्पष्टीकरण लिया जाएगा, या फिर यह मामला भी सिस्टम की फाइलों में दबकर रह जाएगा।
फिलहाल जनता के मन में एक ही सवाल गूंज रहा है— अगर थाने का फोन ही बंद रहेगा, तो संकट की घड़ी में जनता आखिर भरोसा किस पर करे?
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