8 वर्षीय मयंशी खण्डेलवाल को मिला ‘छत्तीसगढ़ रत्न’: छोटी सी उम्र, बड़ा नाम और प्रदेश का मान

उम्र छोटी, हुनर बड़ा! तनिष्क वर्मा और मयंशी खण्डेलवाल ने मुंगेली में सुरों से रचा यादगार समां
मुंगेली में गूंजा तनिष्क-मयंशी का नाम, सुरों की जुगलबंदी ने जीत लिया 500 से अधिक लोगों का दिल
मुंगेली। छत्तीसगढ़ पेंशनधारी कल्याण संघ, जिला मुंगेली का संभागीय सम्मेलन रविवार, 27 सितंबर को दाऊपारा स्थित सतनाम भवन में गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। सम्मेलन में प्रदेशभर से आए पेंशनधारियों, गणमान्य नागरिकों और अतिथियों की मौजूदगी में सामाजिक सरोकार, सम्मान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का अनूठा संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थावे विद्यापीठ, गोपालगंज (बिहार) के कुलपति डॉ. विनय कुमार पाठक रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ. डी.पी. मनहर ने की। समारोह भूषण न्यायमूर्ति चन्द्र भूषण बाजपेयी, विशिष्ट अतिथि डॉ. विनय गुप्ता, डॉ. रमेश चन्द्र श्रीवास्तव, मुंगेली जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीकांत पांडेय एवं मुंगेली जनपद पंचायत अध्यक्ष राम कमल परिहार सहित अन्य अतिथियों की उपस्थिति ने समारोह की गरिमा बढ़ाई।
जब मंच पर उतरीं सुरों की दो पीढ़ियां
सम्मेलन का सबसे आकर्षक और यादगार क्षण तब आया, जब छत्तीसगढ़ रत्न से सम्मानित मास्टर तनिष्क वर्मा और 8 वर्षीय मयंशी खण्डेलवाल ने भजन एवं शास्त्रीय गायन की शानदार प्रस्तुति दी।
मास्टर तनिष्क वर्मा की प्रस्तुति के बाद नन्हीं मयंशी खण्डेलवाल ने जब अपने मधुर स्वर में गायन प्रस्तुत किया तो पूरा सभागार मंत्रमुग्ध हो गया। 500 से अधिक उपस्थित लोगों ने दोनों कलाकारों की प्रस्तुति की जमकर सराहना की और तालियों की गड़गड़ाहट से सतनाम भवन गूंज उठा।
नन्हीं उम्र में मयंशी की शास्त्रीय संगीत पर पकड़ और आत्मविश्वास ने उपस्थित लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
8 साल की मयंशी को मिला ‘छत्तीसगढ़ रत्न’ सम्मान
कार्यक्रम के दौरान 8 वर्षीय मयंशी खण्डेलवाल को छत्तीसगढ़ रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया। कम उम्र में संगीत के क्षेत्र में उसकी प्रतिभा और मंचीय प्रस्तुति को देखते हुए मिले इस सम्मान को समारोह में मौजूद लोगों ने सराहा।
यह सम्मान उस क्षण और भी खास बन गया, जब सम्मान प्राप्त करने वाली नन्हीं कलाकार ने उसी मंच पर अपनी गायन प्रतिभा से उपस्थित जनसमुदाय का दिल जीत लिया।
पेंशनधारियों का सम्मेलन बना नई पीढ़ी की प्रतिभा का मंच
सम्मेलन की खास बात यह रही कि जहां एक ओर कार्यक्रम में वरिष्ठ पेंशनधारियों के अनुभव, सम्मान और सामाजिक योगदान को महत्व दिया गया, वहीं दूसरी ओर नई पीढ़ी की कला प्रतिभाओं को मंच देकर *पीढ़ियों के संवाद और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश भी दिखाई दिया।
कार्यक्रम का मंच संचालन विष्णु कुमार तिवारी एवं रामभजन देवांगन ने किया। आयोजन में बड़ी संख्या में पेंशनधारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं नागरिक उपस्थित रहे।
वरिष्ठों का अनुभव और नन्हीं प्रतिभाओं के सुर—मुंगेली का यह सम्मेलन सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि पीढ़ियों को जोड़ने वाली एक यादगार शाम बन गया।







