राग मल्हार की ‘गरज गरज आज मेघ’ पर गुरु राधिका पाखी संग ईश्वरी-उद्धव की त्रयी ने जीता दिल
रायगढ़, 17 सितंबर 2026। चक्रधर समारोह के मंच पर जब गुरु और शिष्यों के कदम एक साथ थिरके, तो कथक की लय, भाव और ताल ने रामलीला मैदान को मंत्रमुग्ध कर दिया। 41वें चक्रधर समारोह-2026 की सांस्कृतिक संध्या में शिव शक्ति कला संस्थान, बिलासपुर ने गुरु-शिष्य परंपरा को केंद्र में रखते हुए ऐसी कथक प्रस्तुति दी, जिसने कला-प्रेमियों को देर तक बांधे रखा।
गुरु राधिका पाखी के निर्देशन में ईश्वरी पाताडे, उद्धव ठक्कर और स्वयं गुरु राधिका पाखी ने कथक की विभिन्न शैलियों और भावों को मंच पर जीवंत किया। प्रस्तुति के दौरान दर्शकों की तालियों से रामलीला मैदान गूंजता रहा।
गणेश वंदना से शुरुआत, कृष्ण वंदना ने रचा भक्तिमय माहौल
कार्यक्रम का शुभारंभ ईश्वरी पाताडे की भावपूर्ण गणेश वंदना से हुआ। इसके बाद उद्धव ठक्कर ने कृष्ण वंदना प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिरस से भर दिया। दोनों शिष्यों की कथक तराना की युगल प्रस्तुति में लय, ताल और पद-संचालन का सुंदर तालमेल देखने को मिला।
इसके बाद गुरु राधिका पाखी ने एकताल में एकल कथक प्रस्तुति देकर अपनी वर्षों की नृत्य-साधना, तकनीकी दक्षता और मंचीय पकड़ का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
‘गरज गरज आज मेघ’ में बरसे कथक के भाव
प्रस्तुति का सबसे खास आकर्षण रहा गुरु राधिका पाखी, ईश्वरी पाताडे और उद्धव ठक्कर की त्रयी कथक प्रस्तुति। राग मल्हार आधारित ‘गरज गरज आज मेघ’ पर प्रस्तुत इस रचना में वर्षा ऋतु के उमड़ते-घुमड़ते भावों को कथक की लय, ताल, भाव और गतियों के माध्यम से साकार किया गया।
खास बात यह रही कि ‘गरज गरज आज मेघ’ गुरु राधिका पाखी की मौलिक रचना है। गुरु के साथ दोनों शिष्यों की सामंजस्यपूर्ण प्रस्तुति ने मंच पर गुरु-शिष्य परंपरा की जीवंत तस्वीर पेश कर दी।
संगतकारों ने भी बांधा सुरों का मजबूत सेतु
पूरी प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाने में संगतकारों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। गायन पर पुष्पराज देवांगन एवं दिव्या शर्मा, तबले पर दिपायन दास एवं नारायण बरगा, बांसुरी पर हरी साहू तथा पढ़ंत पर आंचल पांडे ने सशक्त संगत प्रदान की। कथक के पद-संचालन और भावों के साथ वाद्य एवं गायन का सुंदर सामंजस्य प्रस्तुति को और प्रभावपूर्ण बनाता रहा।
चक्रधर की धरती पर गुरु-शिष्य परंपरा का सशक्त प्रदर्शन
शिव शक्ति कला संस्थान की इस प्रस्तुति ने केवल कथक की तकनीकी खूबसूरती ही नहीं दिखाई, बल्कि गुरु से शिष्य तक कला-संस्कारों के हस्तांतरण की परंपरा को भी मंच पर जीवंत किया। प्रतिष्ठित चक्रधर समारोह में बिलासपुर के कलाकारों की इस प्रस्तुति को दर्शकों और कला-प्रेमियों की जमकर सराहना मिली।

एक तरफ गुरु की साधना, दूसरी तरफ शिष्यों की ऊर्जा और बीच में कथक की लय—शिव शक्ति कला संस्थान की यह प्रस्तुति चक्रधर समारोह की सांस्कृतिक शाम में यादगार रंग भर गई।







