2003 से लंबित बैकलॉग पर बड़ा सवाल: अजाक्स ने सरकार से कहा— पहले सही गणना, फिर तत्काल भर्ती और पदोन्नति

नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के बैकलॉग पदों को भरने के लिए राज्य सरकार द्वारा विशेष भर्ती अभियान शुरू किए जाने के फैसले का छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति/जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स) ने स्वागत किया है। हालांकि, संगठन ने स्पष्ट किया है कि केवल भर्ती अभियान पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि वर्ष 2003 से अब तक लंबित सभी बैकलॉग पदों की पारदर्शी और विभागवार गणना कराकर वास्तविक रिक्तियों का खुलासा किया जाना चाहिए।

सामान्य प्रशासन विभाग के उप सचिव एस.के. सिंह द्वारा जारी आदेश में सभी विभागों, विभागाध्यक्षों और जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के सीधी भर्ती वाले आरक्षित बैकलॉग पदों को भरने की प्रक्रिया तब तक जारी रखी जाए, जब तक सभी रिक्तियां पूरी तरह भर नहीं जातीं। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या शिथिलता बरती गई तो संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे और इसका उल्लेख उनकी गोपनीय चरित्रावली (सीआर) में भी किया जाएगा।

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए अजाक्स के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मण कुमार भारती और संगठन सचिव जितेंद्र पाटले ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र भेजकर कई अहम मांगें रखी हैं।

अजाक्स का कहना है कि राज्य गठन के बाद से, विशेषकर वर्ष 2003 से अब तक, विभिन्न विभागों में बैकलॉग पदों का वास्तविक आंकड़ा स्पष्ट नहीं है। ऐसे में सरकार पहले सभी विभागों और संवर्गों में लंबित बैकलॉग पदों की नए सिरे से विस्तृत एवं पारदर्शी गणना कराए, ताकि किसी भी पात्र अभ्यर्थी को उसके संवैधानिक अधिकार से वंचित न होना पड़े।

पदोन्नति में आरक्षण पर भी उठाई आवाज

अजाक्स ने केवल सीधी भर्ती ही नहीं, बल्कि वर्ष 2019 से रुकी हुई पदोन्नति में आरक्षण की प्रक्रिया को भी तत्काल शुरू करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि आरक्षण संबंधी बाधाओं के कारण हजारों कर्मचारी पदोन्नति का लाभ लिए बिना ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं। ऐसे में सरकार को लंबित मामलों का शीघ्र समाधान कर पदोन्नति के आदेश जारी करने चाहिए।

अजाक्स का मानना है कि यदि बैकलॉग पदों की सही गणना और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया लागू होती है, तो यह आरक्षित वर्ग के हजारों युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा अवसर साबित होगा। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार विशेष भर्ती अभियान के साथ-साथ बैकलॉग की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने और लंबित पदोन्नतियों पर कितना तेजी से निर्णय लेती है।

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