बिलासपुर नगर निगम की तैयारियों की खुली पोल, शपथ ग्रहण समारोह में पत्रकारों को हुई परेशानियाँ

नगर निगम प्रशासन पर सवाल: क्या महापौर और पार्षदों का नहीं हुआ था शपथ ग्रहण का अभ्यास?

 

बिलासपुर: नगर निगम के शपथ ग्रहण समारोह में न केवल नवनिर्वाचित महापौर पूजा विधानी को एक गड़बड़ी का सामना करना पड़ा, बल्कि पत्रकारों को भी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। मुंगेली नाका स्थित ग्रीन गार्डन मैदान में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में पत्रकारों के लिए बैठने की व्यवस्था ठीक से नहीं की गई थी। पत्रकारों के लिए जो विशेष क्षेत्र निर्धारित किया गया था, वहां पार्टी के लोग भी बैठे हुए थे, जिससे पत्रकारों को अपनी सीट नहीं मिल पाई और उन्हें खड़े रहकर कार्यक्रम को कवर करना पड़ा।

इसके अलावा, पीने के पानी की व्यवस्था भी समय पर नहीं की गई और गर्मी से हलाकान पत्रकारों के लिए कूलर की सुविधा थी, लेकिन वह भी सिर्फ पार्टी के नेताओं की दिशा में था, जिससे पत्रकारों को गर्मी में और भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

आपको बता दें कि  प्रदेश में नगरी निकाय चुनाव 13 फरवरी को संपन्न हुए थे और परिणाम का ऐलान 15 फरवरी को किया गया था। इस चुनाव में बिलासपुर नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) ने शानदार प्रदर्शन किया। भाजपा प्रत्याशी एल पद्मजा ने महापौर की सीट पर जीत हासिल की, और पार्टी ने 49 पार्षदों के साथ सबसे ज्यादा सीटें भी जीतीं।

शुक्रवार को हुए शपथ ग्रहण समारोह में बिलासपुर कलेक्टर शरण ने नवनिर्वाचित महापौर एल पद्मजा और सभी 70 पार्षदों को शपथ दिलाई।

लेकिन शपथ ग्रहण समारोह के दौरान एक छोटी सी गड़बड़ी हुई। महापौर पूजा विधानी ने पहली बार शपथ के दौरान “सांप्रदायिकता को अक्षुण्य रखूंगी” शब्द कहे, जबकि उन्हें “भारत की प्रभुता और अखंडता को अक्षुण्य रखूंगी” कहना था। इस पर कलेक्टर ने महापौर को दूसरी बार शपथ दिलाने का निर्देश दिया। इस गलती के बाद महापौर ने सही शब्दों के साथ शपथ ली।

इस दौरान, कार्यक्रम स्थल पर शोरगुल भी बढ़ गया था क्योंकि मंच में आ रहे पार्षद लगातार शपथ ले रहे थे, जिससे माहौल काफी अव्यवस्थित हो गया था। यह स्थिति ऐसी थी, जैसे किसी व्यस्त सब्जी बाजार में हो, जिससे शपथ ग्रहण की प्रक्रिया थोड़ी असंगठित महसूस हो रही थी। इसको देखते हुए कलेक्टर ने तुरंत और बचे पार्षदों को कहा कि जैसे जैसे मैं बोलूंगा वैसे वैसे आप लोगों को रुक रुक कर बोलना है. उसके बाद व्यवस्था ठीक हुई तब तक निगम की व्यवस्था की पोल खुल चुकी थी .

इस घटना के बाद यह चर्चा का विषय बन गया कि शपथ ग्रहण कार्यक्रम को और अधिक सुव्यवस्थित और व्यवस्थित तरीके से आयोजित किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जा सके। 

वहीं आयोजन में आई छोटी-छोटी गड़बड़ियों ने भी कई सवाल उठाए हैं।

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