जहां किताबें खुलती हैं, वहां बंदूकें झुकती हैं” — विश्व पुस्तक दिवस पर बिलासपुर में अनोखी साहित्यिक क्रांति

बिलासपुर, 23 अप्रैल। मोबाइल की चमकती स्क्रीन के बीच अगर कहीं किताबों की खुशबू अब भी जिंदा है, तो वो बिलासपुर है। डिजिटल दौर के शोर में आज शहर के साहित्यप्रेमियों ने ऐसा संदेश दिया, जिसने साबित कर दिया—किताबें सिर्फ पन्ने नहीं, बल्कि समाज बदलने की ताकत हैं।

विश्व पुस्तक दिवस के मौके पर प्रभात दत्त झा के निवास पर आयोजित साहित्यिक गोष्ठी ने शहर के बौद्धिक माहौल को नई ऊर्जा दे दी। वरिष्ठ साहित्यकारों, शिक्षाविदों और युवाओं की मौजूदगी ने इस आयोजन को सिर्फ कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक विचार क्रांति बना दिया।

गोष्ठी की शुरुआत डॉ. सुभाष दत्त झा के प्रभावशाली उद्बोधन से हुई। उन्होंने याद दिलाया कि 23 अप्रैल को ही विश्व साहित्य के महानायक William Shakespeare का जन्म और निधन हुआ था—यही दिन किताबों को समर्पित होने का सबसे बड़ा कारण बना।

लेकिन असली चर्चा तब गरमाई, जब डॉ. आरती झा ने पढ़ने की आदत के लिए “20-20-20 फॉर्मूला” पेश किया—
– रोज 20 मिनट
– 20 पेज
– लगातार 20 दिन
…और किताबें आपकी जिंदगी का हिस्सा बन जाएंगी!

डिजिटल युग पर तीखा प्रहार करते हुए शिवमंगल शुक्ल ने कहा—“अगर बच्चों को बचाना है, तो उन्हें मोबाइल नहीं, किताबों से जोड़ना होगा।” उन्होंने लाइब्रेरी और सामुदायिक पढ़ाई को आज की सबसे बड़ी जरूरत बताया।

वहीं साहित्यकार डॉ. सर्वेश पाठक ने विदेशी मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा—“बच्चों को बचपन से ही रंगीन किताबों से जोड़ो, तभी वे स्क्रीन की लत से बच पाएंगे।”

संगीता झा ने नई पीढ़ी के लिए बड़ी किताबों को छोटे और आसान संस्करणों में लाने की बात रखी, तो युवा नूपुर शर्मा और श्रद्धा त्रिवेदी ने साफ कहा—“मोबाइल आंखों और मन दोनों को नुकसान पहुंचाता है, जबकि किताबें जीवनभर साथ निभाती हैं।”

कार्यक्रम में “आज की जनधारा” की ओर से सभी प्रतिभागियों को साहित्यिक स्मारिका भेंट कर सम्मानित किया गया।

और अंत में… एक ऐसा वाक्य जिसने सबको झकझोर दिया
जब प्रभात दत्त झा ने कहा—
“जहां पुस्तकें पढ़ी जाती हैं, वहां बंदूकें नीचे रखनी पड़ती हैं।”

ये सिर्फ शब्द नहीं थे… ये बिलासपुर से उठी एक सोच थी, जो शायद पूरे समाज को दिशा दे सकती है।

 किताबें बनाम स्क्रीन की इस जंग में आज बिलासपुर ने साफ संदेश दे दिया—
“भविष्य उन्हीं का है, जो पढ़ते हैं।”

  • पंकज खण्डेलवाल

    Pankaj Khandelwal is the Founder & Principal Editor of News Hub Insight (NHI). He is an independent journalist with expertise in governance, education, public policy, civic issues and investigative reporting. His reporting is based on accuracy, public interest and responsible journalism. Every article published under his editorial supervision follows News Hub Insight's Editorial Policy, Fact Check Policy and Correction Policy.

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