बिलासपुर: ट्रेनों के थमे पहिए जब पटरी पर आए तो उसी अंदाज में राजनीति भी गरमाने लगी, कांग्रेस का दावा- केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ हमने उठाई थी आवाज, रेल रोको आंदोलन के दौरान हमने खाई लाठी और कोर्ट में आज भी चल रहा है मुकदमा

बिलासपुर: जिले के ग्रामीण अंचलों खासकर कोटा विधानसभा क्षेत्र के उन ग्रामीणों के लिए जिनकी लाइफ लाइन रेलवे है, सोमवार से राहत महसूस कर रहे हैं। बीते चार साल से पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों के थमे पहिए,एक बार फिर पटरी पर चल पड़ा है। दिवाली से पहले इसे रेलवे प्रशासन का ग्रामीणों को उपहार के रूप में देखा जा रहा है। सुगम यातायात के साथ ही आजीविका की संभावना भी उस रूप में बढ़ी है। पैसेंजर ट्रेनों के पटरी पर आते ही राजनीति भी सरगर्म होने लगी है। श्रेय की राजनीति शुरू हो गई है। सोमवार को केंद्रीय राज्य मंत्री ने बंद ट्रेनों के परिचालन प्रारंभ करने आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए और ग्रामीणों को केंद्र सरकार की ओर से दिवाली से पहले उपहार दिया। बस फिर क्या था। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस की राजनीति भी इसी अंदाज में गरमा गई। जिला कांग्रेस कमेटी का कहना है कि कांग्रेसजनों ने रेल रोकी,जीआरपी और आरपीएफ की हमने लाठी खाई, रेलवे कोर्ट में मुकदमा हम लड़ रहे हैं। श्रेय किसी दूसरे के द्वारा लुटाया जा रहा है।

कोरोना संक्रमणकाल के दौरान से छोटे-छोटे स्टेशनों में पैसेंजर के ठहराव को बंद कर दिया गया था। पैसेंजर की जगह एक्सप्रेस गाड़ियों का किराया वूसला जा रहा था। छोटे स्टेशनों में स्टापेज बंद करने के अलावा पैसेंजर जैसे ट्रेनों को अनिश्चितकाल के लिए बंद किए जाने के कारण ग्रामीणों की ना केवल आजीविका पर असर पड़ा साथ ही आवागमन के साधन भी सीमित हो गए। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर समूचे प्रदेश में ट्रेनों को चाले करने और पूर्व की तरह स्टापेज की मांग को लेकर कांग्रेसजनों ने रेल रोका आंदोलन किया था जिसकी शुरुआत प्रदेश में सबसे पहले कोटा में सुबह ५ बजे हुई थी , बड़े पैमाने पर कांग्रेसजनों की गिरफ्तारी भी हुई थी। रेलवे कोर्ट में आज भी मुकदमा चल रहा है।

0 जिला कांग्रेस कमेटी के बैनर तले चला था आंदेालन

जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय केशरवानी की अगुवाई में जिले में इसे लेकर बड़ा आंदोलन चलाया गया था।
छोटे स्टेशनों के ट्रेनों के स्टेपज चालू करने और बंद ट्रेनों का परिचालन पुनः प्रारंभ करने की मांग को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ने रेलवे प्रशासन और केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन चलाया था। भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष व सांसद अरुण साव के निवास का घेराव के अलावा तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक सहित भाजपा के केंद्रीय मंत्रियों को काला झंडे दिखाकर रेलवे बोर्ड की चेयरमैन का बिलासपुर रेलवे स्टेशन में ही घेराव किया गया था। रेलवे स्टेशनों में प्रभावी ढंग से धरना प्रदर्शन आंदोलन भी लगातार किया गया था। कोटा रेलवे स्टेशन में सुबह ५ बजे ही रेल रोको आंदोलन के तहत ट्रेन को रोक दिया गया था ,बंद ट्रेनों के स्टापेज प्रारंभ होने के साथ ही इसे लेकर एक बार फिर श्रेय की राजनीति शुरू हो गई है।

0 इंटरनेट मीडिया में जमकर हो रहा प्रसारित- बिलासपुर में जो कुछ भी मिला सिर्फ़ संघर्ष से ही मिला

इंटरनेट मीडिया में इसे लेकर जमकर बातें हो रही है। कांग्रेस की ओर से इसे प्रसारित किया जा रहा है। कांग्रेस लोगों को बता रही है कि यह सब कांग्रेस के आंदोलन का ही सुफल परिणाम है जो आज ग्रामीणों को यह सुविधा फिर से मुहैया कराई जा रही है। वैसे भी बिलासपुर आंदोलनों का शहर रहा है बिलासपुर में बिना संघर्ष के कुछ नहीं मिला है

0 जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ने इंटरनेट मीडिया में कुछ इस तरह किया पोस्ट

जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय केशरवानी ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म में कुछ इस तरह का पोस्ट किया है- कांग्रेस पार्टी सहित संघर्षशील जन मानस द्वारा किए गए आंदोलन का ही सुखद परिणाम है कि चार साल बाद सही, रेलवे प्रशासन ने छोटे स्टेशनों में यात्री गाड़ियों का परिचालन प्रारंभ किया है। रेलवे सुविधाओं को लेकर केंद्र सरकार और रेलवे प्रशासन के खिलाफ़ किए गये आन्दोलन में संघर्षरत समस्त साथियों का दिल से आभार। “कोटा नागरिक संघर्ष समिति के साथियों का भी विशेष आभार किया गया !

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