बैल हुए बेरोजगार
लेखिका रश्मि रामेश्वर गुप्ता अगर मैं ये कहूं कि हमारे बैल बेरोजगार हो गए हैं तो हो सकता है आपको मेरी यह बात बुरी लगे परंतु यह आज का कटु सत्य है। हमारी गौ माता तो सड़कों पर बैठ ही रही है परंतु हमारे बैल अनाथों की भांति इधर-उधर घूम रहे हैं ,जैसे उन्हें किसी ने नौकरी से निकाल दिया हो । एक जमाना था जब बैलों के घंटी की आवाज जब सुनाई पड़ती थी तो मन में उत्सुकता जागृत हो जाती थी । जब हम…















