बिलासपुर: भारतीय भाषाओं के संरक्षण में AI निभाएगा बड़ी भूमिका, गुरु घासीदास विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय संगोष्ठी में मंथन

दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन, 50 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत; भारतीय भाषाओं, ज्ञान परंपरा और तकनीक के समन्वय पर विशेषज्ञों ने रखे विचार

बिलासपुर। भारतीय भाषाओं के संरक्षण, ज्ञान परंपराओं के संवर्धन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बदलते दौर में भाषाई भविष्य पर गंभीर चर्चा के साथ गुरु घासीदास विश्वविद्यालय (केंद्रीय विश्वविद्यालय) में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हुआ। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि भारतीय भाषाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाए तो उनका वैश्विक स्तर पर प्रभाव और उपयोगिता दोनों बढ़ सकती हैं।

विश्वविद्यालय के अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा विभाग द्वारा शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली तथा गुजरात साहित्य अकादमी, गांधीनगर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “भारतीय भाषा, संस्कृति, पहचान एवं ज्ञान परंपराएं” विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन 21 जुलाई को विश्वविद्यालय के रजत जयंती सभागार में हुआ। संगोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत उद्बोधन से हुई। वक्ताओं ने कहा कि भारत भाषाई विविधता वाला देश है, लेकिन सभी भाषाओं की मूल भावना भारतीय संस्कृति और सामाजिक समरसता को मजबूत करती है। इसी विविधता को संरक्षित रखना समय की आवश्यकता है।

संगोष्ठी के संयोजक प्रो. मनीष श्रीवास्तव ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी अतिथियों, विद्वानों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। सह-संयोजिका प्रो. सीमा राय ने कहा कि इस संगोष्ठी ने भारतीय भाषाओं और ज्ञान परंपराओं पर नए दृष्टिकोण से विचार करने का अवसर प्रदान किया, जिससे भविष्य के शोध को नई दिशा मिलेगी।

मुख्य अतिथि एवं सौराष्ट्र विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. नीलांबरी देवे ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिकता को अपनाने के साथ-साथ भारतीय मूल्यों और भाषाओं को संरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से समय प्रबंधन जैसी सकारात्मक आदतों को अपनाने और भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ शिक्षाविद प्रो. अमित कुमार सक्सेना ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) भारतीय भाषाओं के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। उनके अनुसार AI आधारित अनुवाद तकनीकों ने विभिन्न भाषाओं के बीच संवाद को पहले की तुलना में अधिक सरल बनाया है। उन्होंने संस्कृत, तमिल सहित सभी भारतीय भाषाओं के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।

संगोष्ठी के चेयरमैन प्रो. अनुराग चौहान ने दो दिवसीय आयोजन का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इसके बाद शोध पत्र प्रस्तुत करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

समारोह के दौरान मंचासीन अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर मां सरस्वती, छत्तीसगढ़ महतारी और बाबा गुरु घासीदास के चित्रों पर पुष्प अर्पित किए। अतिथियों का पौधा, शॉल, श्रीफल और स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मान भी किया गया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. ज्योति वर्मा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन आयोजन सचिव प्रो. प्रसेनजीत पांडा ने प्रस्तुत किया।

आयोजकों के अनुसार, दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में 50 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विद्यापीठों के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, शोधार्थी तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

 

 

(News Hub Insight संवाददाता की रिपोर्ट एवं विश्वविद्यालय से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के आधार पर।)

  • पंकज खण्डेलवाल

    Pankaj Khandelwal is the Founder & Principal Editor of News Hub Insight (NHI). He is an independent journalist with expertise in governance, education, public policy, civic issues and investigative reporting. His reporting is based on accuracy, public interest and responsible journalism. Every article published under his editorial supervision follows News Hub Insight's Editorial Policy, Fact Check Policy and Correction Policy.

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