बिलासपुर स्मार्ट सिटी के अधिकारी प्रवीण शुक्ला की निगरानी में ‘भ्रष्टाचार की सड़क’ बनाने वाला ठेकेदार कमल सिंह ठाकुर फिर सुर्खियों में! CM साय के ऊर्जा विभाग की नाक के नीचे नाली निर्माण में बिजली चोरी का आरोप, देखिए फोटो और वीडियो

नाली निर्माण का ठेका मेसर्स MT कंस्ट्रक्शन को,एफडीआर घोटाले का आरोपी ठेकेदार कमल सिंह ठाकुर करा रहा निर्माण कार्य

स्मार्ट सिटी के अधिकारी प्रवीण शुक्ला की निगरानी में नेहरु नगर में बनी ‘भ्रष्टाचार की सड़क’ बरसात में फिर उखड़ी, देखिये तस्वीरें

बिलासपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार में प्रशासनिक चुस्ती और मैदानी स्तर पर अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर लगातार जोर दिया जा रहा है। लेकिन बिलासपुर के शांति नगर में चल रहे नगर निगम के नाली निर्माण कार्य से जुड़ा एक मामला यह सवाल जरूर खड़ा करता है कि मौके पर नियमों के पालन की निगरानी और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई का तंत्र कितना सक्रिय है।

शांति नगर में नगर निगम के ठेकेदार MT कंस्ट्रक्शन द्वारा करीब 20 लाख रुपये की लागत से नाली निर्माण(वार्ड क्रमांक 17 रायल बेकरी से गोल्डन प्राविजन स्टोर शांति नगर तक आर सी सी नाली निर्माण कार्य) कराया जा रहा है। 11 अगस्त 2026 को निर्माण कार्य के दौरान बिजली विभाग की मेन लाइन से कथित रूप से हुकिंग कर ड्रिल मशीन चलाए जाने की जानकारी सामने आने पर बिजली विभाग के अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई।

EE से संपर्क की कोशिश, फिर AE का नंबर लगाया गया

मामले की जानकारी EE नेताम को दिए जाने पर उन्होंने टीएल बैठक में होने की बात कही और AE गिरीश श्रीवास्तव से संपर्क करने को कहा। इसके बाद श्रीवास्तव से चार-पांच बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ।

इसके बाद विभाग के ED अंबष्ट से संपर्क किया गया। उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारी से बात की। इसके करीब दो घंटे बाद AE गिरीश श्रीवास्तव का फोन आया और उन्होंने मामले की जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

यहां सवाल सिर्फ कथित बिजली हुकिंग का नहीं, बल्कि यह भी है कि मैदानी स्तर पर निर्माण कार्य चल रहा हो और शिकायत मिलने के बाद जिम्मेदार अधिकारी से संपर्क करने में इतनी कोशिश क्यों करनी पड़ी?

जांच में सामने आया—ठेकेदार ने बिजली लेने की अनुमति नहीं ली

इसके करीब एक घंटे बाद जब मामले की स्थिति जानने के लिए दोबारा संपर्क किया गया तो AE गिरीश श्रीवास्तव ने बताया कि ठेकेदार द्वारा बिजली विभाग से बिजली लेने के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई है।

अधिकारी के अनुसार, ठेकेदार के लेबरों ने कुछ समय के लिए मेन लाइन से बिजली लेने की बात कही थी। उन्होंने यह भी बताया कि निगम से ठेकेदार और निर्माण कार्य से संबंधित जानकारी लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यानी प्रारंभिक स्तर पर ही यह स्पष्ट हो गया कि निर्माण कार्य के लिए बिजली विभाग से अनुमति लेने की बात सामने नहीं आई है।

अब सवाल कार्रवाई का है

मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी निर्माण स्थल पर विद्युत विभाग की मेन लाइन से बिना अनुमति बिजली लेने की पुष्टि होती है, तो विभागीय नियमों के तहत आगे क्या कार्रवाई की जाएगी?

क्या मौके का निरीक्षण कराया जाएगा?

क्या यह निर्धारित किया जाएगा कि वास्तव में कितनी देर तक और किस उपकरण के लिए बिजली ली गई?

क्या विद्युत सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ?

क्या संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होगी?

और सबसे अहम—क्या नगर निगम ने निर्माण कार्य के लिए ठेकेदार को बिजली व्यवस्था के संबंध में कोई शर्त या अनुमति दी थी?

निगम और बिजली विभाग—दोनों की जिम्मेदारी

करीब 20 लाख रुपये के सार्वजनिक धन से हो रहे निर्माण कार्य की निगरानी केवल ठेकेदार की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। नगर निगम को यह देखना होता है कि उसके कार्यस्थल पर काम निर्धारित तकनीकी और सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो रहा है या नहीं।

दूसरी ओर, विद्युत विभाग की जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि उसकी विद्युत लाइन से कोई व्यक्ति या एजेंसी बिना वैध अनुमति बिजली न ले और यदि ऐसा मामला सामने आता है तो नियमानुसार कार्रवाई हो।

इस पूरे घटनाक्रम में इसलिए दो स्तरों पर जवाबदेही बनती है—निर्माण एजेंसी की भूमिका और संबंधित विभागों की निगरानी।

अधिकारी गंभीर हैं तो कार्रवाई भी दिखनी चाहिए

मामले में विभागीय अधिकारी द्वारा अनुमति नहीं होने की जानकारी दिए जाने के बाद अब निगाह इस बात पर रहेगी कि आगे क्या कार्रवाई होती है। केवल यह कहना कि निगम से ठेकेदार की जानकारी लेकर कार्रवाई की जाएगी, पर्याप्त नहीं होगा।

यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो कार्रवाई स्पष्ट और रिकॉर्ड पर होनी चाहिए। वहीं यदि जांच में यह साबित होता है कि बिजली का उपयोग वैध प्रक्रिया के तहत हुआ था, तो विभाग को उसकी अनुमति और दस्तावेज भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करने चाहिए।

सार्वजनिक धन से होने वाले निर्माण कार्य में गुणवत्ता जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही महत्वपूर्ण विद्युत सुरक्षा और नियमों का पालन भी है। शांति नगर का यह मामला अब यही देखने का अवसर है कि शिकायत के बाद सरकारी तंत्र सिर्फ जानकारी जुटाता है या वास्तव में जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई तक भी पहुंचता है।

  • पंकज खण्डेलवाल

    Pankaj Khandelwal is the Founder & Principal Editor of News Hub Insight (NHI). He is an independent journalist with expertise in governance, education, public policy, civic issues and investigative reporting. His reporting is based on accuracy, public interest and responsible journalism. Every article published under his editorial supervision follows News Hub Insight's Editorial Policy, Fact Check Policy and Correction Policy.

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