विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने किया विमोचन, बोले—भाषा के संरक्षण और अध्ययन में महत्वपूर्ण कृति
छत्तीसगढ़ी भाषा की विरासत को मिला नया अध्याय, डॉ. रमन सिंह ने किया ‘संपूर्ण व्याकरण’ के चौथे संस्करण का विमोचन
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ी भाषा के अध्ययन, शोध और संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जाने वाली कृति ‘छत्तीसगढ़ का संपूर्ण व्याकरण’ के चतुर्थ संस्करण का गरिमामय विमोचन छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने रायपुर के शंकर नगर स्थित अपने आवास पर किया। पुस्तक का लेखन डॉ. विनय कुमार पाठक एवं डॉ. विनोद कुमार वर्मा ने किया है।
विमोचन अवसर पर डॉ. रमन सिंह ने लेखकद्वय को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि प्रदेश की लोकसंस्कृति, परंपरा और सामाजिक पहचान की महत्वपूर्ण धरोहर है। ऐसे में भाषा के व्याकरणिक स्वरूप को व्यवस्थित एवं प्रामाणिक रूप में प्रस्तुत करने वाली कृतियों का विशेष महत्व है।
उन्होंने ‘छत्तीसगढ़ का संपूर्ण व्याकरण’ को छत्तीसगढ़ी भाषा के अध्ययन एवं संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण और उपयोगी कृति बताते हुए छत्तीसगढ़वासियों से इसके अध्ययन, संरक्षण एवं व्यापक उपयोग की अपील की।
इस अवसर पर पुस्तक के लेखक डॉ. विनय कुमार पाठक ने डॉ. रमन सिंह का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने पुस्तक के विमोचन के लिए समय प्रदान करने तथा छत्तीसगढ़ी भाषा एवं साहित्य के प्रति उनके समर्पण और निष्ठा के लिए आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में डॉ. रमेशचंद्र श्रीवास्तव, आई.एस.एस. तथा विष्णु कुमार तिवारी, समीक्षक एवं मानस-मर्मज्ञ भी उपस्थित रहे। दोनों ने पुस्तक के चतुर्थ संस्करण के प्रकाशन पर लेखकद्वय को शुभकामनाएं देते हुए इसे छत्तीसगढ़ी भाषा के साहित्यिक एवं शैक्षणिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
चौथा संस्करण बना भाषा-संरक्षण की नई कड़ी
‘छत्तीसगढ़ का संपूर्ण व्याकरण’ का चतुर्थ संस्करण छत्तीसगढ़ी भाषा के व्याकरणिक स्वरूप, अध्ययन, शोध और संरक्षण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पुस्तक का लगातार नए संस्करणों के साथ सामने आना इस बात का संकेत है कि छत्तीसगढ़ी भाषा को व्यवस्थित रूप से समझने और पढ़ने के लिए इसकी उपयोगिता बनी हुई है।
छत्तीसगढ़ी भाषा की जड़ों से जुड़ी इस कृति का चौथा संस्करण अब भाषा प्रेमियों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और साहित्यकारों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री के रूप में सामने आया है।







