हाई कोर्ट आदेश की “गलत व्याख्या” और कथित कूटरचना का मामला, DEO ने तत्काल प्रभाव से किया सस्पेंड

 शिक्षा व्यवस्था में “फर्जी व्याख्या” का खेल कब तक?

शिक्षा विभाग में बड़ा एक्शन : पदोन्नति गड़बड़ी मामले में सहायक ग्रेड-02 मनोज साहू निलंबित

मुंगेली। जिला शिक्षा विभाग में पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर बड़ा प्रशासनिक एक्शन सामने आया है। जिला शिक्षा अधिकारी मुंगेली ने सहायक ग्रेड-02 श्री मनोज कुमार साहू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या करते हुए पदोन्नति समिति को भ्रमित किया और संबंधित पक्षकारों की पदोन्नति कराई।

जारी आदेश के अनुसार, माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा पारित निर्णय की कथित रूप से गलत व्याख्या कर 09 पक्षकारों को सहायक शिक्षक से प्रधान पाठक प्राथमिक शाला पद पर पदोन्नति दिलाने का मामला सामने आया। आरोप है कि इस प्रक्रिया में कूटरचना कर पदोन्नति समिति को गुमराह किया गया।

मामले में कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था, लेकिन विभाग ने जवाब को “असंतोषजनक एवं समाधानकारक नहीं” माना। इसके बाद छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए मनोज कुमार साहू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

लोरमी बनाया गया मुख्यालय

निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय लोरमी निर्धारित किया गया है। साथ ही नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता भी दी गई है।

शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप

कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप की स्थिति है। विभागीय गलियारों में अब इस बात की चर्चा तेज है कि पदोन्नति प्रक्रिया में और कौन-कौन लोग जांच के दायरे में आ सकते हैं।

बड़ा सवाल

अब सवाल यह उठ रहा है कि:

  • पदोन्नति समिति तक कथित गलत जानकारी कैसे पहुंची?
  • क्या इस मामले में केवल एक कर्मचारी जिम्मेदार है?
  • या फिर पूरा नेटवर्क जांच के घेरे में आएगा?

शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई को प्रशासनिक सख्ती और जवाबदेही से जोड़कर देखा जा रहा है।

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