बिलासपुर साहित्य जगत में गूंजा वसंती वर्मा का सम्मान, ‘मोर अंगना के फूल’ से रचा इतिहास

साहित्य वाचस्पति मानद उपाधि मिलने पर शहर के बुद्धिजीवियों ने किया भव्य अभिनंदन

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ी साहित्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाली कवयित्री वसंती वर्मा का सम्मान समारोह उस समय भावुक और गौरवपूर्ण माहौल में बदल गया, जब शहर के साहित्यकारों, शिक्षाविदों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने उन्हें “साहित्य वाचस्पति” की मानद उपाधि मिलने पर जोरदार अभिनंदन किया। प्रयास प्रकाशन साहित्य अकादमी द्वारा होटल बंसी वाला के भव्य सभागार में आयोजित यह समारोह साहित्यिक गरिमा और सांस्कृतिक संवेदना का अद्भुत संगम बन गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति चंद्रभूषण वाजपेई ने कहा कि वसंती वर्मा ने अपने चर्चित छत्तीसगढ़ी काव्य संग्रह “मोर अंगना के फूल” को विमर्श के साथ प्रकाशित कर साहित्य जगत में एक नई परंपरा स्थापित की। उन्होंने कहा कि हिंदी साहित्य अकादमी गांधीनगर, अहमदाबाद द्वारा प्रदान की गई “साहित्य वाचस्पति” की मानद उपाधि न केवल वसंती वर्मा, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के साहित्यिक समाज के लिए गौरव का विषय है।

समारोह की अध्यक्षता कर रहे डॉ. विनय कुमार पाठक ने कहा कि वसंती वर्मा ने छत्तीसगढ़ी कविता को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने डॉ. विनोद कुमार वर्मा के साथ मिलकर विमर्श आधारित प्रथम काव्य संग्रह प्रकाशित कर साहित्य जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई और यश अर्जित किया।

डॉ. विनोद कुमार वर्मा ने हिंदी साहित्य अकादमी गुजरात के रजत जयंती समारोह का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां उन्हें “राजभाषा रत्न” से सम्मानित किया गया, वहीं वसंती वर्मा को “साहित्य वाचस्पति” की मानद उपाधि प्रदान की गई, जो उनके जीवन का अविस्मरणीय क्षण रहा।

पूर्व विधायक चंद्रप्रकाश बाजपेई ने वर्मा दंपति को उनकी उपलब्धियों पर बधाई देते हुए इसे बिलासपुर की साहित्यिक चेतना का सम्मान बताया। वहीं मानस मर्मज्ञ विष्णु कुमार तिवारी ने प्रयास प्रकाशन साहित्य अकादमी की दीर्घ साहित्यिक परंपरा में वसंती वर्मा के योगदान को अत्यंत प्रासंगिक बताया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजन और मयंशी खंडेलवाल की सरस्वती वंदना से हुआ। स्वागत उद्बोधन में डॉ. रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने प्रयास प्रकाशन साहित्य अकादमी की 60 वर्षों की साहित्यिक यात्रा और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।

समारोह में वसंती वर्मा को श्रीफल, स्मृति चिन्ह और अभिनंदन पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। डॉ. गजेंद्र तिवारी ने अभिनंदन पत्र का वाचन किया। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय कथक नृत्यांगना आंचल पांडे, रोशन गुप्ता, डॉ. एन.के. चौरे, मंजु चौरे, डॉ. श्वेता कश्यप, राहुल वर्मा, ज्योति गभेल सहित विभिन्न साहित्यिक एवं सामाजिक संगठनों ने उनका अभिनंदन किया।

अपने उद्बोधन में वसंती वर्मा ने साहित्यिक संघर्ष और सृजन यात्रा को साझा करते हुए अपनी प्रतिनिधि कविता का पाठ किया, जिसने पूरे सभागार को भाव-विभोर कर दिया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. राघवेंद्र कुमार दुबे ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन डॉ. शत्रुघ्न जैसवानी ने व्यक्त किया।

समारोह में स्वदेश के संपादक विनेश दीक्षित, न्यूज़ हब इनसाइट केयर फाउंडेशन के निदेशक पंकज खंडेलवाल, डॉ. वी.के. गुप्त, रीना झा, सृष्टि सिंह, कवयित्री यामिनी तिवारी एवं संस्कार भारती के राजेश कुमार सोनार सहित अनेक साहित्यप्रेमियों और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

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