बिलासपुर : फूड ऑफिसर अमृत कुजूर और ऑयल कंपनी अधिकारियों की निष्क्रियता पर उठे सवाल, इन पेट्रोल पंपों पर मुफ्त हवा सुविधा दम तोड़ रही — कलेक्टर साहब संज्ञान लीजिए!

“मशीन खराब है…”

बिलासपुर के इन पेट्रोल पंपों पर हवा नहीं, बहानों की सप्लाई जारी!

बिलासपुर में इन दिनों पेट्रोल पंपों पर एक अजीब व्यवस्था चल रही है। पेट्रोल-डीजल बिना रुकावट बिक रहा है, कैश और ऑनलाइन पेमेंट धड़ल्ले से हो रहे हैं, लेकिन जैसे ही कोई ग्राहक टायर में हवा भरवाने पहुंचता है, जवाब मिलता है — “मशीन खराब है…” या “कर्मचारी नहीं है…”

शहर के पल्लव भवन के पास स्थित पेट्रोल पंप और मिनोचा कॉलोनी का पेट्रोल पंप पर उपभोक्ताओं को इसी तरह टरकाया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह समस्या एक-दो दिन की नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही आदत बन चुकी है।

सबसे दुखद पहलू यह है कि आम लोग जल्दबाजी में होते हैं — किसी को ऑफिस पहुंचना है, किसी को बच्चों को स्कूल छोड़ना है, कोई मरीज लेकर जा रहा होता है। ऐसे में हर व्यक्ति शिकायत केंद्र खोजने या अधिकारियों के चक्कर लगाने का समय नहीं निकाल पाता। पेट्रोल पंप संचालक भी इसी मजबूरी का फायदा उठाते दिखाई देते हैं। उन्हें पता है कि ग्राहक नाराज होकर चला जाएगा, लेकिन शिकायत करने में अपना समय बर्बाद नहीं करेगा।

यानी जनता की मजबूरी ही इनकी सबसे बड़ी ताकत बन गई है।

सवाल यह है कि जब मुफ्त हवा देना नियम के तहत अनिवार्य है, तो आखिर जिम्मेदार विभाग आंखें बंद करके क्यों बैठे हैं?
क्या खाद्य विभाग, तेल कंपनियां और जिला प्रशासन को यह दिखाई नहीं देता?
या फिर “मशीन खराब” का बहाना अब व्यवस्था द्वारा भी स्वीकार कर लिया गया है?

अगर मशीन सच में खराब है, तो उसे कितने घंटे में ठीक करना अनिवार्य है?
क्या कोई मॉनिटरिंग होती है?
क्या कभी किसी पंप पर कार्रवाई हुई?
अगर नहीं, तो फिर नियम केवल बोर्ड और कागजों तक सीमित क्यों हैं?

विडंबना देखिए — पेट्रोल भरने वाली मशीनें शायद ही कभी खराब होती हैं, लेकिन हवा मशीनें हमेशा संकट में रहती हैं। इससे साफ संदेश जाता है कि जहां कमाई जुड़ी है वहां व्यवस्था चुस्त है, और जहां जनता को मुफ्त सुविधा देनी है वहां लापरवाही स्थायी हो चुकी है।

यह केवल हवा भरने का मुद्दा नहीं है। यह उपभोक्ता अधिकार, जवाबदेही और सिस्टम की नीयत का सवाल है। टायर में सही हवा न होने से दुर्घटना का खतरा बढ़ता है, वाहन की माइलेज घटती है और आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।

जरूरत अब केवल शिकायत की नहीं, कार्रवाई की है।
जिला प्रशासन को शहर के पेट्रोल पंपों की औचक जांच करनी चाहिए। जो पंप मुफ्त हवा सुविधा देने में लापरवाही कर रहे हैं, उन पर जुर्माना और लाइसेंस संबंधी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही हर पंप पर शिकायत नंबर और जिम्मेदार अधिकारी का नाम बड़े अक्षरों में अनिवार्य रूप से प्रदर्शित होना चाहिए।

क्योंकि जनता अब यह समझ चुकी है कि
“मशीन खराब” सिर्फ तकनीकी समस्या नहीं…
बल्कि जिम्मेदारों की संवेदनहीनता का सबसे आसान बहाना बन चुका है।

अब सवाल सीधे तेल कंपनियों के सेल्स अधिकारियों और खाद्य विभाग से है कि आखिर शहर के इन पेट्रोल पंपों पर मुफ्त हवा सुविधा केवल बोर्ड तक सीमित क्यों है? क्या निरीक्षण सिर्फ कागजों में हो रहा है, या जिम्मेदारों ने जनता की परेशानी को सामान्य मान लिया है?”

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