युवा कवि योगेश्वर सिंह राठौर ने राष्ट्रीय काव्यपाठ में जीता द्वितीय स्थान
बिलासपुर | 13 अप्रैल 2026 । छत्तीसगढ़ की साहित्यिक धरती से एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा का परचम लहराया है। मध्यप्रदेश के तिरोड़ी स्थित मॉयल मंगल भवन में आयोजित राष्ट्रीय साहित्यकार सम्मेलन 2026 में जांजगीर के प्रतिष्ठित कवि सुरेश पैगवार को उनके उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए “साहित्य शिरोमणि सम्मान–2026” से नवाजा गया।
युवा प्रतिभा का धमाका
सम्मेलन के दौरान आयोजित राष्ट्रीय स्तर की युवा काव्यपाठ प्रतियोगिता में जांजगीर के युवा कवि योगेश्वर सिंह राठौर ने देशभर से आए प्रतिभागियों के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए द्वितीय स्थान हासिल किया।
यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के उभरते साहित्यिक भविष्य की मजबूत झलक है।
चार सत्रों में सजा भव्य आयोजन
यह प्रतिष्ठित सम्मेलन चार सत्रों में संपन्न हुआ, जिसमें:
- प्रतियोगिता के मुख्य अतिथि: सुरेश पैगवार
- अध्यक्षता: रितेश माने (मॉयल तिरोड़ी खान)
- विशिष्ट अतिथि: भैया लाल नागवंशी, पंकज जुगनू, डॉ. गोपाल राम साहू
- संचालन: राष्ट्रीय कवि दिनेश देहाती
रेल और स्वच्छता पर लिखे गीतों का मिला सम्मान
सुरेश पैगवार को यह सम्मान उनके चर्चित गीतों के लिए प्रदान किया गया:
- 🚆 “रेल गीत — भारत के जीवन की रेखा”
- ♻️ “चलो करें ये वादा, रेल को स्वच्छ बनाएंगे”
यह सम्मान स्व. बद्री नारायण चौकसे की स्मृति में, उनके सुपुत्र सत्यनारायण चौकसे, मॉयल लिमिटेड के खान प्रबंधक मनीष ढोके सहित अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में प्रदान किया गया।
रात में सजा अखिल भारतीय कवि सम्मेलन
कार्यक्रम के अंतिम चरण में आयोजित भव्य कवि सम्मेलन में देशभर के नामचीन कवियों ने काव्यपाठ किया, जिनमें प्रमुख रहे:
- विनोद नयन (जबलपुर)
- शादाब अंजुम (नागपुर)
- वीरेन्द्र विद्रोही (ललितपुर)
- सुरेश पैगवार (जांजगीर)
- पंकज जुगनू (वर्धा)
साथ ही कवयित्रियों माधुरी किरण, निशा आनंद तिवारी एवं प्रमिला किरण ने भी अपनी प्रस्तुति से समां बांध दिया।
साहित्य जगत में मजबूत पकड़
सुरेश पैगवार वर्तमान में कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं:
- जिला समन्वयक — राजभाषा आयोग
- जिला अध्यक्ष — राष्ट्रीय कवि संगम
- जिला सचिव — छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य परिषद
- अध्यक्ष — जिला उद्घोषक संघ
बधाइयों की बौछार
इस उपलब्धि पर बिलासपुर और जांजगीर सहित पूरे प्रदेश के साहित्यकारों ने हर्ष व्यक्त करते हुए शुभकामनाएं दीं। विभिन्न साहित्यिक संगठनों और वरिष्ठ रचनाकारों ने इसे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का क्षण बताया।
सुरेश पैगवार का सम्मान और योगेश्वर राठौर की सफलता यह साबित करती है कि छत्तीसगढ़ अब सिर्फ संस्कृति ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय साहित्यिक मंच पर भी अपनी दमदार पहचान बना रहा है।















