बिलासपुर में सड़क बनी मंच: अश्लीलता का खुला प्रदर्शन, पुलिस का खौफ नदारद

“सड़क पर तमाशा बनता शहर — बिलासपुर किस ओर जा रहा है?”

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ का शांत और सांस्कृतिक शहर बिलासपुर इन दिनों जिस तरह की घटनाओं का गवाह बन रहा है, वह केवल कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं, बल्कि समाज के गिरते स्तर का आईना भी है।

रविवार को रिवर व्यू संडे मार्केट में पर्स चोरी के शक में शुरू हुआ विवाद जिस तरह खुलेआम लात-घूंसे, बाल खींचने और मारपीट में बदल गया, उसने यह साफ कर दिया कि अब छोटी-छोटी बातों पर भीड़ का व्यवहार किस हद तक उग्र हो चुका है। और यह कोई सुनसान जगह नहीं थी—यह एक सार्वजनिक स्थल था, जहां परिवार, महिलाएं और बच्चे मौजूद थे।

दूसरी ओर, शिव टॉकीज चौक पर जो हुआ, वह तो और भी चिंताजनक है। पैसों के लेनदेन का विवाद इस स्तर तक गिर गया कि एक युवक ने बीच सड़क पर कपड़े उतारकर अश्लील हरकतें शुरू कर दीं। यह केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि सामाजिक मर्यादा और सार्वजनिक शिष्टाचार की खुलेआम हत्या है।

सबसे बड़ा सवाल: डर खत्म या सिस्टम कमजोर?

इन दोनों घटनाओं में एक बात समान है—*न तो कानून का डर, न समाज की शर्म।*
जब लोग खुलेआम सड़क पर मारपीट करते हैं, कपड़े उतारते हैं, अश्लील हरकतें करते हैं, तो यह संकेत है कि:

* पुलिस का भय कम हो चुका है
* सामाजिक नियंत्रण कमजोर हो गया है
* और भीड़ मानसिकता (Mob Mentality) हावी हो रही है

शिकायत नहीं = अपराध नहीं?*

संडे मार्केट की घटना में पुलिस का यह कहना कि “शिकायत नहीं मिली” — क्या यह पर्याप्त है?
आज अपराध केवल FIR पर निर्भर नहीं है, *सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो भी सबूत है*।

अगर प्रशासन केवल शिकायत का इंतजार करेगा, तो अपराधी खुलेआम “वीडियो बनाओ, वायरल करो और निकल जाओ” के फॉर्मूले पर काम करेंगे।

नया ट्रेंड: वायरल होने के लिए हिंसा?

आज का सबसे खतरनाक ट्रेंड यह बनता जा रहा है कि:

* पहले झगड़ा करो
* फिर वीडियो बनाओ
* फिर वायरल हो जाओ

यह “क्राइम + पब्लिसिटी” का नया मॉडल है, जो युवाओं को गलत दिशा में ले जा रहा है।

समाज को भी देखना होगा आईना

सिर्फ पुलिस को दोष देना आसान है, लेकिन सवाल समाज से भी है:

* क्या हम तमाशबीन बन चुके हैं?
* क्या वीडियो बनाना मदद करने से ज्यादा जरूरी हो गया है?
* क्या हम अपने बच्चों को संयम और संवाद सिखा पा रहे हैं?

समाधान क्या है? (सिर्फ आलोचना नहीं, रास्ता भी)

1. सुओ-मोटो कार्रवाई: वायरल वीडियो के आधार पर तुरंत केस दर्ज हो
2. पब्लिक प्लेस में पुलिस की नियमित पेट्रोलिंग बढ़े
3. अश्लीलता और गुंडागर्दी पर सख्त और त्वरित सजा
4. युवाओं के लिए काउंसलिंग और जागरूकता अभियान
5. स्थानीय नागरिकों की जिम्मेदारी तय हो — “देखो और रोकों” संस्कृति विकसित हो

शहर का चरित्र बचाना होगा

बिलासपुर केवल सड़कों और इमारतों का नाम नहीं है, यह एक पहचान है—संस्कृति, मर्यादा और सभ्यता की पहचान।

अगर आज इन घटनाओं को “छोटी-मोटी बात” समझकर नजरअंदाज किया गया, तो कल यही शहर “अराजकता का अड्डा” बन सकता है।

अब वक्त है—प्रशासन सख्त हो, समाज सजग हो और कानून का डर फिर से कायम किया जाए।

वरना वह दिन दूर नहीं, जब परिवार के साथ घर से निकलना भी एक जोखिम बन जाएगा।

  • पंकज खण्डेलवाल

    Pankaj Khandelwal is the Founder & Principal Editor of News Hub Insight (NHI). He is an independent journalist with expertise in governance, education, public policy, civic issues and investigative reporting. His reporting is based on accuracy, public interest and responsible journalism. Every article published under his editorial supervision follows News Hub Insight's Editorial Policy, Fact Check Policy and Correction Policy.

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