बिलासपुर: कलेक्टर को नहीं है लेक्चरर का तबादला करने का अधिकार

“युक्तियुक्तकरण” पर हाई कोर्ट की दस्तक : शिक्षक बोले – हमारे हक से खिलवाड़ मंजूर नहीं

बिलासपुर: स्कूल शिक्षा विभाग में चल रही “युक्तियुक्तकरण” प्रक्रिया अब कोर्ट के कटघरे में है। सरकार के दो आदेशों और दो आंदोलनों के बाद भी जब शिक्षक समुदाय की बात नहीं सुनी गई, तो अब 34 शिक्षकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ताओं में छत्तीसगढ़ विद्यालयीन कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय कुमार तिवारी भी शामिल हैं।

इस युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया को लेकर शिक्षक साफ हैं—यह न्याय के साथ खिलवाड़ है। कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि शासन ने जो नया आदेश 25 अप्रैल 2025 को जारी किया है, उसमें शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के बजाय उलझा दिया गया है। इसमें स्वीकृत पदों को मर्ज कर, वरिष्ठ शिक्षकों को उनके पदों से नीचे गिरा दिया गया है।

प्रश्नवाचक चिन्हों से भरा “युक्तियुक्तकरण”

शिक्षकों का आरोप है कि सरकार अपनी मनमर्जी से “सेटअप” निकाल रही है, जिसमें तयशुदा पदों को ही समाप्त किया जा रहा है। मर्जर के नाम पर जहां प्रायमरी और मिडिल स्कूलों को मिलाया जा रहा है, वहीं हेडमास्टर जैसे वरिष्ठ पदों को सहायक शिक्षक में तब्दील कर दिया जा रहा है। इससे केवल पद नहीं, शिक्षक का आत्मसम्मान भी मिट रहा है। एक हेडमास्टर, जो अब तक प्रशासकीय कार्य देखता था, अचानक क्लास में वापस बैठा दिया गया—बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के।

विरोध की आवाजें और कानूनी पेंच

याचिका में इस बात को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है कि शासन ने पहले ही एक मामले में अदालत में स्वीकार किया था कि हेडमास्टर का पद “प्रशासकीय” है, जिसे शिक्षक में बदला नहीं जा सकता। बावजूद इसके अब उसी शासन ने अपने ही कथन के खिलाफ आदेश निकाल दिया। यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, भरोसे का भी अपमान है।

इतना ही नहीं, याचिका में यह भी बताया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत जो “छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा भर्ती एवं पदोन्नति नियम 2019” बनाए गए हैं, उनमें किसी संशोधन के बिना यह काउंसिलिंग करवाई जा रही है। अपील करने का कोई अवसर नहीं दिया गया है, जो सीधे तौर पर प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का हनन है।

कलेक्टर बन गए “ट्रांसफर मैन”?

शिक्षकों की याचिका में एक और गंभीर प्रश्न खड़ा किया गया है—क्या कलेक्टर को लेक्चरर का तबादला करने का अधिकार है? शिक्षा विभाग की नियमावली कहती है कि यह अधिकार मंत्री के अनुमोदन से ही संभव है। लेकिन युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में कलेक्टर को ही नोडल ऑफिसर बना दिया गया है। सवाल ये है कि कलेक्टर कानून से ऊपर कैसे हो सकते हैं?

समाप्त होती संवेदनशीलता, बचती लड़ाई

एक शिक्षक का पद केवल नौकरी नहीं होता—वो भविष्य गढ़ता है। पर जब उसी शिक्षक को उसके दर्जे से गिराकर फिर से क्लास में बैठा दिया जाए, तो सवाल उठता है कि यह “शिक्षा सुधार” है या “शिक्षक विघटन”?

संघ के पदाधिकारी कहते हैं – “हम न्याय की मांग कर रहे हैं, किसी सौगात की नहीं। हम अदालत में इसलिए हैं क्योंकि लोकतंत्र में यही आखिरी रास्ता बचता है जब बाकी सब दरवाज़े बंद हो जाते हैं।”

अब फैसला हाई कोर्ट करेगा, पर सवाल जनता का भी है—क्या शिक्षक का सम्मान एक प्रशासनिक सेटअप से छोटा हो गया है?

 

  • पंकज खण्डेलवाल

    Pankaj Khandelwal is the Founder & Principal Editor of News Hub Insight (NHI). He is an independent journalist with expertise in governance, education, public policy, civic issues and investigative reporting. His reporting is based on accuracy, public interest and responsible journalism. Every article published under his editorial supervision follows News Hub Insight's Editorial Policy, Fact Check Policy and Correction Policy.

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