बिलासपुर: भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता वी रामा राव ने बिलासपुर वासियों की कि चिंता, कहा- रेल अधिकारियों के बेतुके फैसले से सेंट्रल स्कूल सड़क पर रोज लग रहा जाम

बिलासपुर: रेलवे के अधिकारियों ने रेल कर्मचारियों की सुरक्षा का हवाला देकर रेलवे कॉलोनी की गलियों की नाकेबंदी कर दी है। मामले का दिलचस्प पहलू यह है कि इससे सबसे अधिक परेशानी रेल कर्मचारियों को ही हो रही है।

उक्त बातें बोलते हुए रेलवे क्षेत्र के पूर्व पार्षद और भारतीय जनता पार्टी के नेता वी रामा राव ने कहा कि वैसे तो भारतीय रेलवे भी सरकार का ही एक उपक्रम है, लेकिन रेलवे के अधिकारी अपना एक अलग साम्राज्य की परिकल्पना रखते हैं, तभी तो अक्सर रेल अधिकारी अपने क्षेत्र में गैर रेलवे के लोगों के प्रवेश को बर्दाश्त नहीं कर पाते। ऐसा कई बार किया गया कि रेलवे क्षेत्र की सड़कों को आम लोगों की आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया। इसका कई बार विरोध भी हुआ, लेकिन रेलवे अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। अभी हाल ही में भारत माता स्कूल के बगल वाली सड़क पर अचानक नाकेबंदी कर दी गई। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के विरोध के बाद एक दिन के लिए इसे खोला गया, लेकिन वापस ढाक के तीन पात नजर आ रहे हैं । यह समस्या अभी खत्म नहीं हुई थी कि बिलासपुर के रेलवे आरटीएस कॉलोनी की उन गलियों के मुहाने को बंद कर दिए गए जो गुरु नानक चौक से सेंट्रल स्कूल की ओर जाती थी। इससे एक साथ कई दिक्कत सामने आई है। एक तो रेलवे कर्मचारी और उनके परिजनों को लंबी दूरी तय कर बाजार, स्कूल, अस्पताल, दुकान जाना पड़ रहा है, तो वहीं, जिस सुरक्षा की बात कही गई थी, वही खतरे में है; क्योंकि सड़क पर बेरियर लगा दिए जाने की वजह से ना तो तोरवा पुलिस इन गलियों में रात को रात्रिगश्त कर पाती है और ना ही आपातकालीन सूचना पर 112 की टीम या एंबुलेंस ही पहुंच पा रही है, जिससे रेल कर्मचारी परेशान है।

वी रामा राव का कहना है कि रेलवे अधिकारियों के इस तुगलकी फरमान से सबसे अधिक परेशानी सेंट्रल स्कूल आने जाने वाले बच्चों और उनके पेरेंट्स को हो रही है। दरअसल सेंट्रल स्कूल की छुट्टी दोपहर 1:40 को होती है। बच्चों को रिसीव करने उनके पेरेंट्स, बस, कार, रिक्शा, ऑटो आदि बड़ी संख्या में उनकी प्रतीक्षा करते हैं। मुख्य मार्ग पर इतनी जगह न होने से अधिकांश लोग मुख्य मार्ग से लगे आरटीएस कॉलोनी की गलियों में इंतजार करते थे जिस वजह से यह सड़क आवाजाही के लिए खुली रहती थी, लेकिन वर्तमान में इन गलियों पर बैरिकेड लगा दिए जाने से अब लोग सेंट्रल स्कूल मार्ग पर ही अपने वाहनों के साथ बच्चों की प्रतीक्षा करते हैं , जिस वजह से स्कूल लगने और छूटने के समय यहां बुरी तरह जाम की स्थिति बन जाती है, जिससे न केवल स्कूल के बच्चे प्रभावित हो रहे हैं बल्कि गुरु नानक चौक से रेलवे क्षेत्र और रेलवे क्षेत्र से गुरु नानक चौक की ओर आने वाले लोग भी खासे परेशान हैं ।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है , जब रेलवे अधिकारियों ने इस तरह की बेसिरपैर का फैसला लिया लिया हो। इस फैसले से कर्मचारियों का कोई हित नहीं हो रहा, ना ही रेलवे क्षेत्र को कोई अतिरिक्त सुरक्षा मिल पा रही है । उल्टे रेल कर्मचारियों से लेकर आम लोगों को इससे परेशानी हो रही है। इसलिए जनप्रतिनिधियों ने अपना विरोध भी दर्ज कराया, लेकिन रेलवे के अधिकारी किसी की सुनने को तैयार नहीं।

रामाराव ने कहा कि जनप्रतिनिधियों ने इस मुद्दे को जीएम से लेकर सांसद और रेल मंत्री तक पहुंचाने का निर्णय लिया है। वे स्वयं भी आने वाले दिनों में जोन की जीएम और डीआरएम से मुलाकात कर इस विषय पर चर्चा कर निदान निकालने का प्रयास करेंगे। उनका कहना है कि यह एकमात्र अकेली सड़क नहीं है, जिससे रेलवे के अधिकारियों ने इस तरह से रोक दिया है। इससे पहले भी बंगला यार्ड, तार बाहर क्षेत्र में इस तरह के प्रयास हुए हैं और हर बात इसका विरोध भी हुआ है। शायद बाहर से आए रेलवे के अधिकारी यह बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं कि कथित तौर पर उनकी सड़कों से आम लोग गुजरे। इसी वजह से इस तरह के बेतुके फैसले लिए जाते हैं। एक तरफ तो रेलवे के अधिकारी अपने निवास क्षेत्र में विकास की गंगा बहा रहे हैं और कर्मचारियो की कॉलोनियो में धेले भर का काम नहीं हो रहा। दूसरी ओर इस तरह के बेसिर पैर के फैसले से उनकी परेशानी और बढ़ रही है , जिसे लेकर जनप्रतिनिधियों के साथ आम लोगों में भी रोष है।

  • पंकज खण्डेलवाल

    Pankaj Khandelwal is the Founder & Principal Editor of News Hub Insight (NHI). He is an independent journalist with expertise in governance, education, public policy, civic issues and investigative reporting. His reporting is based on accuracy, public interest and responsible journalism. Every article published under his editorial supervision follows News Hub Insight's Editorial Policy, Fact Check Policy and Correction Policy.

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